सागर जिले के सिद्धक्षेत्र बालाजी मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बंडा से वर्चुअल माध्यम द्वारा जुड़कर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कथा आयोजकों, संत-महंतों और उपस्थित भक्तों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण ईश्वर की कृपा और भक्ति प्राप्ति का दुर्लभ अवसर होता है। मुख्यमंत्री ने कथावाचक भक्तिपथ महाराज श्री इन्द्रेश उपाध्याय की मधुर वाणी और दिव्य प्रवचनों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कथा से ऐसा प्रतीत होता है मानो भगवान श्रीकृष्ण स्वयं भक्ति का संदेश दे रहे हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि वह स्वयं कथा स्थल पर उपस्थित रहकर कथा श्रवण करें, किन्तु कार्यक्रमों की व्यस्तता के कारण वे सागर नहीं पहुँच सके। उन्होंने कहा कि संतों, महापुरुषों और कथावाचकों की परंपरा सदियों से समाज को सद्मार्ग, धर्म, सहज जीवन और भक्ति का मार्ग दिखाती रही है तथा ऐसे आयोजनों से समाज में श्रद्धा, नैतिकता और धर्म मूल्यों का संवर्धन होता है। उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से गौ-रक्षा, धर्म संरक्षण और सनातन परंपराओं की मर्यादा कायम रहती है।
कृष्ण लीलास्थलियों को तीर्थ के रूप में विकसित करने का बड़ा अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण की हर छोटी-बड़ी लीलास्थली को मथुरा-वृंदावन की तरह विश्वस्तरीय तीर्थस्थल के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में ऐसे अनेक पवित्र स्थल हैं जिन्हें भगवान कृष्ण की लीलाओं के कारण धार्मिक महत्व प्राप्त है। इन सभी स्थानों को पहचानकर तीर्थ के स्वरूप में विकसित करने का कार्य तेजी से जारी है।

उन्होंने बताया—
- जनापाव पहाड़ी से संदीपनी आश्रम के बीच स्थित वह स्थान जहाँ भगवान परशुराम ने श्रीकृष्ण को दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया, उसे श्रद्धास्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- माता रुक्मणि का जन्मस्थान,
- अमझिरा स्थल,
- तथा अन्य सभी पवित्र धाम जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने लीला की—इन सभी को तीर्थ के रूप में पहचाना गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश कृष्ण भक्ति और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार इसका प्राचीन वैभव वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
गीता जयंती पर प्रदेशव्यापी कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने बताया कि गीता जयंती के अवसर पर प्रदेश के नगर निगम, नगर पंचायत, जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर विशेष समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गीता भवनों का निर्माण प्रदेशभर में प्रारंभ किया गया है, ताकि लोग गीता के उपदेशों, नैतिक जीवन मूल्यों और धर्म सिद्धांतों के प्रति अधिक जुड़ाव महसूस करें।

उन्होंने यह भी कहा कि—
- बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में गीता ज्ञान का प्रसार करने हेतु सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं।
- सागर में तीन सौ वर्ष पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार और कायाकल्प किया जा रहा है, जिसे गीता भवन के रूप में विकसित किया जाएगा।
- गीता जयंती के आगामी उत्सव तक इसका निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता का संदेश केवल धर्मग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला और कर्तव्य पालन का मार्गदर्शन है।
संत-महंत समाज को मुख्यमंत्री का नमन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कथावाचक संत इंद्रेश उपाध्यायजी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि उनकी दिव्य वाणी और आध्यात्मिक ज्ञान से समाज निरंतर लाभान्वित हो रहा है। उन्होंने कहा—
“आप जैसे संत समाज को आध्यात्मिक जागरण के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। आप दीर्घायु हों और सतत् भक्तिपथ पर हमें आगे ले जाने का कार्य ऐसे ही करते रहें।”
उन्होंने कथा आयोजक विधायक श्री शैलेंद्र जैन, उनकी धर्मपत्नी, आयोजन समिति और सभी भक्तों को मंगलकामनाएँ देते हुए कहा कि इस आयोजन से सागर में भक्ति, आध्यात्मिकता और संस्कृति का सुंदर संगम हुआ है।
अंत में मुख्यमंत्री ने सभी के ‘यश, गौरव और वैभव’ की कामना करते हुए श्रद्धालुओं को साधुवाद दिया और कहा कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज को नैतिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाते हैं।