गणेशोत्सव के पावन अवसर पर मालथौन क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का माहौल देखने को मिला। इसी क्रम में भाजपा युवा नेता श्री अविराज सिंह इमलिया किशोर, मालथौन स्थित भगवान श्री गणेश जी की आरती में सम्मिलित हुए। भक्तों की भारी उपस्थिति के बीच उन्होंने भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्री गणेश सिर्फ विघ्नहर्ता ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले प्रथम पूज्य देव हैं।

अहंकार पर प्रहार का संदेश
अपने उद्बोधन में अविराज सिंह ने कहा कि भगवान गणेश का जीवन हमें स्पष्ट संदेश देता है कि अहंकार से किसी को भी लाभ नहीं मिलता। उन्होंने पौराणिक प्रसंग सुनाते हुए कहा – जब धन के देवता कुबेर ने अहंकारवश भगवान शिवजी को अपने महल में भोजन का निमंत्रण दिया, तब भगवान शिव ने गणेश जी को वहाँ भेजा। गणेश जी ने इतना भोजन किया कि महल का समस्त अनाज समाप्त हो गया। तब कुबेर का अहंकार चूर हुआ और उन्हें समझ आया कि संसार की हर वस्तु केवल ईश्वर की कृपा है। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी भी धन, पद या सामर्थ्य का घमंड नहीं करना चाहिए।

ज्ञान और धैर्य का प्रतीक
अविराज सिंह ने कहा कि जब महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखने का संकल्प किया, तब ब्रह्मा जी के परामर्श पर गणेश जी को लेखक बनाया गया। गणेश जी ने तीन वर्षों तक बिना थके निरंतर महाभारत लिखी। इस कारण उन्हें एकदंत के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रसंग हमें धैर्य, एकाग्रता और ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को गणेश जी से प्रेरणा लेकर ज्ञान अर्जन, संयम और विवेक को जीवन में उतारना चाहिए।
पाँच तत्वों का महत्व
युवा नेता ने जीवन और आध्यात्मिकता के गहरे संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा शरीर पाँच तत्वों से निर्मित है।
- आकाश तत्व के अधिदेव भगवान शिव हैं,
- जल तत्व के अधिदेव भगवान विष्णु,
- वायु तत्व की अधिदेवी माँ भगवती,
- अग्नि तत्व के अधिदेव भगवान सूर्य,
- और पृथ्वी तत्व के अधिदेव भगवान श्री गणेश।
यह व्यवस्था दर्शाती है कि मानव शरीर स्वयं ईश्वर का मंदिर है और हमारी आत्मा उसी परमात्मा का अंश है। इसलिए हमें सदैव धर्म और सत्य के मार्ग पर चलकर अपनी आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

भक्तिमय माहौल में आयोजन
मालथौन के इमलिया किशोर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में भक्तों ने श्री गणेश की आरती और भजन संध्या में उत्साहपूर्वक भाग लिया। आरती के दौरान वातावरण “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने गणेश जी से परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र के विकास और समाज में भाईचारे की प्रार्थना की।
युवाओं के लिए संदेश
अविराज सिंह ने खासकर युवाओं से कहा कि उन्हें गणेश जी की तरह विनम्रता और ज्ञान को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा – “हमारा जीवन तभी सार्थक होगा जब हम अपने अंदर से घमंड को निकालकर, ज्ञान और कर्म के मार्ग पर चलेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज का प्रत्येक युवा गणेश जी की सीख को आत्मसात कर ले, तो समाज में किसी भी प्रकार का अन्याय, भेदभाव या अहंकार स्थान नहीं पाएगा।
धार्मिक आस्था और सामाजिक जुड़ाव
गणेशोत्सव के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज को एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने माना कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिलता है।
अंत में, अविराज सिंह ने सभी क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे गणेश जी के आशीर्वाद से अपने जीवन को अहंकारमुक्त, ज्ञानयुक्त और धर्ममय बनाएं।