बीना (मध्य प्रदेश)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बीना इकाई में सामंजस्य बिगड़ता नजर आ रहा है। एक ओर जहां पार्षदों की शिकायतों के बाद नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार को संगठन द्वारा तलब किया गया, वहीं दूसरी ओर शासकीय आयोजनों में नगर पालिका अध्यक्ष और जनपद अध्यक्ष उषा राय की अनदेखी की शिकायतें सामने आई हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि यह अनदेखी प्रशासनिक स्तर पर हो रही है या फिर किसी के दबाव में ऐसा किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना सम्मेलन को लेकर विवाद
30 अप्रैल को कृषि उपज मंडी में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाना है, जिसकी नोडल एजेंसी नगर पालिका है। लेकिन इस आयोजन से जुड़ी तैयारियों में नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार को दरकिनार किया जा रहा है। पंजीयन केंद्र पूरे विधानसभा क्षेत्र में केवल विधायक कार्यालय में ही बनाया गया, जिसके बाद नपाध्यक्ष ने स्वयं नगर पालिका में एक अलग पंजीयन केंद्र स्थापित करवाया और इसकी सूचना फेसबुक के माध्यम से प्रसारित की।
जनप्रतिनिधियों को नहीं मिल रही बैठकों की सूचना
जनपद अध्यक्ष उषा राय और उपाध्यक्ष अमर प्रताप सिंह ने बार-बार शिकायत की है कि उन्हें आयोजन से जुड़ी बैठकों की सूचना नहीं दी जा रही है। उन्होंने यह शिकायत कलेक्टर, एसडीएम और भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी से भी की, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। रविवार को एसडीएम कार्यालय में हुई एक बैठक में भी नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार ने सीएमओ रामप्रकाश जगनेरिया से सूचना न मिलने की शिकायत की। वहीं, जनपद अध्यक्ष उषा राय ने एक बार फिर जिलाध्यक्ष को फोन कर इस मामले में आपत्ति जताई।

बैठक में कर्मचारियों की अनुपस्थिति, भाजपा नेताओं की भीड़
रविवार को हुई बैठक में जहां सम्मेलन से जुड़े जिम्मेदार कर्मचारी कम संख्या में मौजूद थे, वहीं अन्य लोगों की भीड़ ज्यादा थी। स्थानाभाव के कारण कई कर्मचारी बैठक छोड़कर चले गए।
एसडीएम का बयान: “जनप्रतिनिधि अपेक्षित नहीं थे”
एसडीएम विजय डेहरिया ने कहा कि यह एक प्रशासनिक बैठक थी और जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि उन्हें सूचना किसने दी। नोडल एजेंसी नगर पालिका है और सभी सूचनाएं व व्यवस्थाएं सीएमओ रामप्रकाश जगनेरिया की जिम्मेदारी हैं।”

राजनीतिक विश्लेषण
इस पूरे प्रकरण से भाजपा की बीना इकाई में आंतरिक मतभेद स्पष्ट झलक रहे हैं। नगर पालिका अध्यक्ष और जनपद अध्यक्ष की लगातार अनदेखी से पार्टी के स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दल इस मौके का फायदा उठाकर भाजपा पर एकता की कमी का आरोप लगा सकते हैं।
बीना में भाजपा के भीतर चल रही इस खींचतान ने पार्टी के सामने अनुशासन और समन्वय की चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासनिक अराजकता और नेताओं के बीच बढ़ते तनाव के बीच, पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करके स्थिति को सामान्य करने की आवश्यकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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