भारत ने ही विश्व को शतरंज, योग और गणना जैसे उपहार दिए – अविराज सिंह

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भारत ने सदियों से विश्व को अद्भुत उपहार दिए हैं। योग, गणना और शतरंज जैसे अनुपम वरदान हमारी धरती से ही पूरी दुनिया को मिले हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सागर में रामसरोज समूह और स्वदेश चेस अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय शतरंज प्रतियोगिता का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि युवा भाजपा नेता अविराज भूपेंद्र सिंह ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है कि आज भारत के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतरंज जैसे बौद्धिक खेल में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह भारत की ही मिट्टी है जिसने दुनिया को सोचने, गिनने और मन व शरीर को संतुलित रखने की कला सिखाई है। योग ने जहां विश्वभर में स्वास्थ्य और अध्यात्म का नया अध्याय खोला है, वहीं शतरंज ने मानसिक क्षमता और रणनीति की शक्ति को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। अविराज सिंह ने विश्व चैम्पियन गुकेश डी का उदाहरण देते हुए कहा कि मात्र 19 वर्ष की आयु में उनका खिताब जीतना भारत की नई पीढ़ी की प्रतिभा और संकल्प का प्रमाण है।

खेलों से मिलता है विजेता का दृष्टिकोण

अविराज सिंह ने कहा कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह युवाओं को विजेता की मानसिकता (Winning Mindset) प्रदान करते हैं। खेलों से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति हार-जीत से परे होकर निरंतर प्रयास करना सीखता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के विचारों को याद करते हुए कहा – “हार में न जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं, कर्तव्य पथ पर जो मिला यह भी सही वह भी सही।”

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी सक्रिय भागीदारी करें, क्योंकि आज सरकारी और निजी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए आरक्षण और विशेष कोटा उपलब्ध है।

प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

कार्यक्रम का आयोजन समाजसेवी शैलेश केशरवानी, अखिलेश मोनी केसरवानी और संजीव केशरवानी ने अपने पूज्य माता-पिता एवं पूर्वजों की स्मृति में किया। इस प्रतियोगिता को सागर संभाग की अब तक की सबसे बड़ी शतरंज प्रतियोगिता माना जा रहा है। विजेताओं को कुल 2 लाख 22 हजार रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा।

इस अवसर पर एसपी स्पेशल ब्रांच दिनेश कौशल ने कहा कि शतरंज बच्चों की सोचने की क्षमता को गहराई देता है और यह खेल उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में निर्णय लेने और रणनीति बनाने की कला सिखाता है। उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतरंज में करियर की अपार संभावनाएं हैं।

समाजसेवियों ने दिए विचार

समाजसेवी शैलेश केशरवानी ने कहा कि यह सागर में पहली बार इतनी बड़ी शतरंज प्रतियोगिता हो रही है। रामसरोज समूह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को भी निःशुल्क प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय बदल गया है – “खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब” की कहावत अब पुरानी हो चुकी है। आज बच्चे पढ़ाई के साथ खेलों में भी भविष्य बना सकते हैं।

समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि शतरंज हमें सिखाता है कि जीत-हार से बड़ा प्रयास होता है। खिलाड़ी जब लगातार अभ्यास करते हैं तो एक दिन सफलता अवश्य मिलती है।

समाजसेवी राजेश पंडित ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता से बच्चों को बड़ा मंच मिलता है। उन्हें दिग्गज खिलाड़ियों से सीखने का अवसर प्राप्त होता है। छोटे-छोटे बच्चों का शतरंज में अद्भुत प्रदर्शन देखकर गर्व की अनुभूति होती है।

आयोजन को मिली व्यापक सहभागिता

प्रतियोगिता का संचालन स्वदेश चेस अकादमी के संचालक अभिजीत अवस्थी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर से खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, नॉर्थ बंगाल, दिल्ली, पंजाब, बिहार और उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों से प्रतिभागी सागर पहुंचे हैं।

कार्यक्रम में विधायक शैलेंद्र जैन के सुपुत्र सूर्यआदित्य जैन, समाजसेवी संदीप सिंह कुशवाहा, सेंट्रल बैंक के रीजनल मैनेजर कुंदन कुमार, शिक्षिका स्वाति मैम सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल में आकाश प्यासी, नितिन चौरसिया, ललित पटेल, अनुराज सोनी सहित कई सदस्य शामिल थे।

बच्चों को मिला बड़ा मंच

कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों और समाजसेवियों ने कहा कि छोटे बच्चों के बीच इस स्तर की प्रतियोगिता आयोजित करना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। इससे उन्हें आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने की प्रेरणा मिलेगी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों और दर्शकों की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया। आयोजन समिति ने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी इस तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, ताकि सागर और आसपास के क्षेत्र के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

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