भारत-पाकिस्तान संबंधों और ऑपरेशन सिंदूर पर राहुल गांधी के सवाल: एक राजनीतिक विवाद !

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में भारत-पाकिस्तान संबंधों और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। 22 मई 2025 को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन सवाल पूछे, और अगले दिन, 23 मई 2025 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को निशाने पर लिया। यह विवाद जयशंकर के एक साक्षात्कार से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पर चर्चा की थी। राहुल गांधी ने जयशंकर के बयान को आधार बनाकर दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत में पाकिस्तान को सूचित करना एक “अपराध” था। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी को “निशान-ए-पाकिस्तान” करार देते हुए उनकी टिप्पणियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। यह रिपोर्ट इस विवाद के सभी पहलुओं, इसके राजनीतिक और सामरिक प्रभावों को विस्तार से प्रस्तुत करती है।

ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ

ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य कार्रवाई थी, जो 7 मई 2025 को शुरू हुई। यह पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के मुख्यालय शामिल थे, को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक सैन्य तनाव रहा, जिसका समापन 10 मई को युद्धविराम समझौते के साथ हुआ।

राहुल गांधी के सवाल और विवाद की शुरुआत

1. जयशंकर पर सवाल (23 मई 2025)

राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक साक्षात्कार को आधार बनाया, जो डच ब्रॉडकास्टर NOS को दिया गया था। इस साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत में भारत ने पाकिस्तान को संदेश भेजा था कि वह केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, न कि सैन्य ठिकानों को। जयशंकर के शब्द थे:

“ऑपरेशन की शुरुआत में, हमने पाकिस्तान को एक संदेश भेजा था कि हम आतंकी ढांचे पर हमला कर रहे हैं, न कि सैन्य ठिकानों पर। इसलिए सैन्य बलों के पास यह विकल्प था कि वे इससे अलग रहें और इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करें। उन्होंने इस अच्छी सलाह को नहीं माना।”

राहुल गांधी ने इस बयान को आधार बनाकर 17 मई और 19 मई को X पर पोस्ट किए, जिसमें उन्होंने इसे “अपराध” करार दिया और पूछा:

  1. भारत को पाकिस्तान के साथ क्यों जोड़ा गया है?
  2. पाकिस्तान की निंदा में एक भी देश ने भारत का साथ क्यों नहीं दिया?
  3. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए किसने कहा?

राहुल ने यह भी दावा किया कि जयशंकर की “चुप्पी” इस मामले में “निंदनीय” है और पूछा कि इस जानकारी के कारण भारतीय वायुसेना को कितने विमानों का नुकसान हुआ।

2. पीएम मोदी पर सवाल (22 मई 2025)

एक दिन पहले, राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी से तीन सवाल पूछे थे, जो उनके बीकानेर, राजस्थान में दिए गए बयान के जवाब में थे। पीएम मोदी ने 22 मई को एक सभा में कहा था:

“पाकिस्तान भारत से कभी सीधी लड़ाई नहीं जीत सकता। इसलिए आतंकवाद को भारत के खिलाफ हथियार बनाया है। लेकिन अब मां भारती का सेवक मोदी यहां सीना तानकर खड़ा है। मोदी का दिमाग ठंडा है, लेकिन लहू गर्म है। अब तो मोदी की नसों में लहू नहीं, गर्म सिंदूर बह रहा है।”

इसके जवाब में राहुल ने X पर पोस्ट किया, जिसमें पीएम मोदी की एक वीडियो क्लिप थी, जिसमें वह कह रहे थे कि पाकिस्तान ने आतंकी गतिविधियां और सैन्य दुस्साहस बंद करने का आश्वासन दिया था, जिसके आधार पर भारत ने युद्धविराम पर विचार किया। राहुल ने इसके आधार पर पूछा:

  1. आतंकवाद पर आपने पाकिस्तान की बात पर भरोसा क्यों किया?
  2. ट्रम्प के सामने झुककर आपने भारत के हितों की कुर्बानी क्यों दी?
  3. आपका खून सिर्फ कैमरों के सामने ही क्यों गरम होता है?

राहुल ने पीएम मोदी पर “खोखले भाषण” देने का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्होंने भारत के सम्मान से समझौता किया।

सरकार और भाजपा की प्रतिक्रिया

1. विदेश मंत्रालय का खंडन

विदेश मंत्रालय (MEA) ने राहुल गांधी के दावों को “तथ्यों का पूर्ण दुरूपयोग” करार दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जयशंकर ने यह नहीं कहा कि पाकिस्तान को ऑपरेशन शुरू होने से पहले सूचित किया गया था, बल्कि यह संदेश ऑपरेशन की शुरुआती अवस्था में भेजा गया था। MEA के बयान में कहा गया:

“विदेश मंत्री ने कहा था कि हमने पाकिस्तान को ऑपरेशन की शुरुआत में चेतावनी दी थी, जो स्पष्ट रूप से ऑपरेशन शुरू होने के बाद की प्रारंभिक अवस्था है। इसे गलत तरीके से पहले सूचना देने के रूप में पेश किया जा रहा है।”

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक इकाई ने भी जयशंकर के बयान को गलत उद्धृत करने की बात को खारिज किया और कहा कि यह दावा भ्रामक है।

2. भाजपा का पलटवार

भाजपा ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को “पाकिस्तान की भाषा बोलना” करार दिया और उन्हें “निशान-ए-पाकिस्तान” की संज्ञा दी। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा:

“राहुल गांधी सेना की वीरता को कमतर आंकना बंद करें। उनके सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। उनकी टिप्पणियां बचकानी नहीं, बल्कि शत्रुतापूर्ण राष्ट्रों के एजेंडे को बढ़ावा देती हैं।”

भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने X पर लिखा:

“राहुल गांधी की मूर्खता केवल संयोगवश नहीं है, यह सुनियोजित है। वह तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे हैं। भारत को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर गर्व है, लेकिन राहुल गांधी ने पीएम को बधाई तक नहीं दी।”

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज पर राहुल गांधी की टिप्पणियों के प्रसारण का हवाला देते हुए कहा कि वह और पाकिस्तानी मीडिया “एक ही भाषा” बोल रहे हैं।

राजनीतिक और सामरिक प्रभाव

1. राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस

राहुल गांधी के सवालों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर एक तीखी बहस छेड़ दी है। उनके दावों ने ऑपरेशन सिंदूर की गोपनीयता और भारत की सामरिक रणनीति पर सवाल उठाए, जिसे सरकार ने “गलत तथ्यों का प्रचार” करार दिया। सैन्य अधिकारियों, जैसे डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, ने स्पष्ट किया कि भारत ने ऑपरेशन के तुरंत बाद पाकिस्तान से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया था।

2. अंतरराष्ट्रीय धारणा

राहुल गांधी के सवालों में यह मुद्दा उठाया गया कि पाकिस्तान की निंदा में कोई देश भारत के साथ क्यों नहीं आया। यह भारत की कूटनीतिक स्थिति पर एक गंभीर टिप्पणी है। हालांकि, सरकार ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न देशों में भेजा गया, जिसमें कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी शामिल थे, ताकि भारत का पक्ष रखा जाए।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !

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