भोपाल। राजधानी की कोलार सिक्स लेन रोड के लिए 4105 पेड़ों की कटाई अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्त निगरानी में आ गई है। ट्रिब्यूनल ने सड़क और विकास कार्यों के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर सवाल उठाते हुए नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह लगाए गए पौधों का पूरा लेखा-जोखा हलफनामे के साथ पेश करे।
मामला नितिन सक्सेना बनाम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कोलार रोड के चौड़ीकरण में 4105 पेड़ अवैध रूप से काटे गए, जबकि 11 मील–बंगरसिया रोड के लिए प्रस्तावित 1377 पेड़ों की अनुमति सक्षम ‘ट्री ऑफिसर’ द्वारा नहीं दी गई। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी ने नगर निगम को 1.26 करोड़ रुपए भी जमा नहीं कराए, जिससे एनओसी जारी नहीं हो सकी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पेड़ काटने की अनुमति सक्षम प्राधिकारी से नहीं ली गई, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है।

पौधरोपण में देखरेख की कमी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नगर निगम और पीडब्ल्यूडी द्वारा लगाए गए पौधे देखरेख की कमी के कारण सूख रहे हैं, जबकि दस्तावेजों में हर साल बड़े पैमाने पर रोपण दिखाया जाता है। एनजीटी की बेंच में जज एसके सिंह और सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई की।
एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नगर निगम को यह जानकारी फोटो और वीडियो साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करनी होगी कि:
- कितने पौधे लगाए गए
- किस वर्ष लगाए गए
- उन पर कितना फंड खर्च हुआ
- पौधों का सर्वाइवल रेट
- औसत ऊंचाई
साथ ही मेंटेनेंस का पूरा विवरण देना होगा, जैसे नियमित पानी, खाद, कैजुअल्टी रिप्लेसमेंट, बाड़बंदी, कीट नियंत्रण और सुरक्षा उपाय। एनजीटी ने कहा कि यह सिर्फ पेड़ काटने का मामला नहीं है, बल्कि शहरी हरियाली की विश्वसनीयता का सवाल है।
अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी, जब तय होगा कि भोपाल में हरियाली सच में बढ़ रही है या केवल फाइलों में।
भोपाल: एनजीटी ने सुरजीत हुंडई की अपीलें खारिज की, 11.71 लाख रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना बरकरार
भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (सेंट्रल जोन) ने सुरजीत हुंडई की दो अपीलें खारिज कर दी हैं। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय क्षति की भरपाई वसूलने का पूरा अधिकार है।
मामला गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित हुंडई के अधिकृत शोरूम और सर्विस स्टेशन से जुड़ा है। बोर्ड की जांच में ईटीपी न चलाने और अशोधित पानी के बाहर बहाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 15 मई 2023 को क्लोजर नोटिस और 26 जून 2023 को संचालन बंद करने के निर्देश जारी किए गए।
बावजूद इसके, यूनिट के संचालन जारी रहने का आरोप लगा। बोर्ड ने सीपीसीबी गाइडलाइंस के तहत 11,71,875 रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा तय किया। कंपनी की दलील थी कि वाहन वॉशिंग आउटसोर्स थी, लेकिन एनजीटी ने इसे खारिज कर दिया।
एनजीटी ने कहा कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन तकनीकी दलीलों से नहीं टाला जा सकता।