भोपाल। प्रदेशभर के हजारों अतिथि शिक्षक सोमवार को राजधानी भोपाल के अंबेडकर मैदान, तुलसी नगर में इकट्ठा हुए। “गुरु दक्षिणा कार्यक्रम” के बैनर तले आयोजित इस विशाल प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार का ध्यान अतिथि शिक्षकों की वर्षों पुरानी समस्याओं और अस्थिर भविष्य की ओर आकर्षित करना था।
इस आंदोलन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि वे बीते 18 सालों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं, लेकिन अब भी उन्हें न तो स्थायीत्व मिला है और न ही बुनियादी सुविधाओं का अधिकार।

“गुरुजी” की तरह हमें भी स्थायीत्व चाहिए – शिक्षकों की गुहार
अतिथि शिक्षकों ने मांग उठाई कि जिस तरह पहले “गुरुजी” शिक्षकों को नियमित किया गया था, उसी तर्ज पर अतिथि शिक्षकों के लिए भी स्पष्ट और ठोस नीति बनाई जाए।
उनका कहना है कि बार-बार वादे किए गए, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
संघ की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न अतिथि शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी मांगें मंच से स्पष्ट कीं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- भविष्य की सुरक्षा – वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों को नौकरी से बाहर करने की प्रथा खत्म की जाए।
- नियमितीकरण नीति – जैसे “गुरुजी” शिक्षकों को स्थायीत्व दिया गया था, वैसे ही अतिथि शिक्षकों को भी नियमित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
- अवकाश नीति लागू हो – नियमित शिक्षकों की तरह अतिथि शिक्षकों को भी 13 कैजुअल लीव (CL) और 3 अर्जित अवकाश (EL) का अधिकार मिले।
- अनुचित बहिष्कार पर रोक – नए भर्ती या प्रमोशन के नाम पर वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों को बाहर न किया जाए।
- सेवा का सम्मान – 15–18 सालों से लगातार कार्यरत अतिथि शिक्षकों को “संविदा” या “अस्थायी” न मानकर उनके अनुभव और योगदान का सम्मान किया जाए।
संगठन के नेताओं के बयान
- पुष्कर (अध्यक्ष, आजाद अतिथि शिक्षक संघ, सिंगरौली):
“हम सिर्फ अपने हक की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने हमें कार्यक्रम की अनुमति दी है और हम शांतिपूर्ण ढंग से सरकार के सामने अपनी बात रखेंगे। अब और अनदेखी नहीं चलेगी।” - सुनील सिंह परिहार (प्रतिनिधि, अतिथि शिक्षक समन्वय संघ):
“आज प्रदेशभर से आए शिक्षक इस उम्मीद में यहां इकट्ठा हुए हैं कि शिक्षा मंत्री हमारी समस्याओं को सुनेंगे और ठोस समाधान देंगे। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक हमें स्थायीत्व नहीं मिलता।”
मंत्री को सौंपा जाएगा प्रस्ताव
इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को भी आमंत्रित किया गया है। संघ की ओर से उन्हें एक लिखित प्रस्ताव सौंपा जाएगा, जिसमें नियमितीकरण और अवकाश नीति समेत सभी मांगें शामिल होंगी।
आंदोलन का असर और आगे की राह
अतिथि शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रदेशभर में करीब 90 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जो लंबे समय से सरकार की अस्थायी नीतियों के चलते अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं।
निष्कर्ष
भोपाल का यह प्रदर्शन सिर्फ नौकरी की सुरक्षा की मांग नहीं, बल्कि उस शिक्षक वर्ग की पुकार है जिसने सालों तक कम वेतन और अस्थायी व्यवस्था में रहकर भी शिक्षा की लौ जलाए रखी। अब सवाल यह है कि क्या सरकार “गुरु दक्षिणा” कार्यक्रम की इस गूंज को सुनेगी और अतिथि शिक्षकों के लिए स्थायीत्व की ठोस राह बनाएगी, या फिर यह संघर्ष आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?
भोपाल। प्रदेशभर के हजारों अतिथि शिक्षक सोमवार को राजधानी भोपाल के अंबेडकर मैदान, तुलसी नगर में इकट्ठा हुए। “गुरु दक्षिणा कार्यक्रम” के बैनर तले आयोजित इस विशाल प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार का ध्यान अतिथि शिक्षकों की वर्षों पुरानी समस्याओं और अस्थिर भविष्य की ओर आकर्षित करना था।
इस आंदोलन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि वे बीते 18 सालों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं, लेकिन अब भी उन्हें न तो स्थायीत्व मिला है और न ही बुनियादी सुविधाओं का अधिकार।
“गुरुजी” की तरह हमें भी स्थायीत्व चाहिए – शिक्षकों की गुहार
अतिथि शिक्षकों ने मांग उठाई कि जिस तरह पहले “गुरुजी” शिक्षकों को नियमित किया गया था, उसी तर्ज पर अतिथि शिक्षकों के लिए भी स्पष्ट और ठोस नीति बनाई जाए।
उनका कहना है कि बार-बार वादे किए गए, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
संघ की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न अतिथि शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी मांगें मंच से स्पष्ट कीं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- भविष्य की सुरक्षा – वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों को नौकरी से बाहर करने की प्रथा खत्म की जाए।
- नियमितीकरण नीति – जैसे “गुरुजी” शिक्षकों को स्थायीत्व दिया गया था, वैसे ही अतिथि शिक्षकों को भी नियमित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
- अवकाश नीति लागू हो – नियमित शिक्षकों की तरह अतिथि शिक्षकों को भी 13 कैजुअल लीव (CL) और 3 अर्जित अवकाश (EL) का अधिकार मिले।
- अनुचित बहिष्कार पर रोक – नए भर्ती या प्रमोशन के नाम पर वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों को बाहर न किया जाए।
- सेवा का सम्मान – 15–18 सालों से लगातार कार्यरत अतिथि शिक्षकों को “संविदा” या “अस्थायी” न मानकर उनके अनुभव और योगदान का सम्मान किया जाए।
संगठन के नेताओं के बयान
- पुष्कर (अध्यक्ष, आजाद अतिथि शिक्षक संघ, सिंगरौली):
“हम सिर्फ अपने हक की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने हमें कार्यक्रम की अनुमति दी है और हम शांतिपूर्ण ढंग से सरकार के सामने अपनी बात रखेंगे। अब और अनदेखी नहीं चलेगी।” - सुनील सिंह परिहार (प्रतिनिधि, अतिथि शिक्षक समन्वय संघ):
“आज प्रदेशभर से आए शिक्षक इस उम्मीद में यहां इकट्ठा हुए हैं कि शिक्षा मंत्री हमारी समस्याओं को सुनेंगे और ठोस समाधान देंगे। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक हमें स्थायीत्व नहीं मिलता।”
मंत्री को सौंपा जाएगा प्रस्ताव
इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को भी आमंत्रित किया गया है। संघ की ओर से उन्हें एक लिखित प्रस्ताव सौंपा जाएगा, जिसमें नियमितीकरण और अवकाश नीति समेत सभी मांगें शामिल होंगी।
आंदोलन का असर और आगे की राह
अतिथि शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रदेशभर में करीब 90 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जो लंबे समय से सरकार की अस्थायी नीतियों के चलते अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं।
निष्कर्ष
भोपाल का यह प्रदर्शन सिर्फ नौकरी की सुरक्षा की मांग नहीं, बल्कि उस शिक्षक वर्ग की पुकार है जिसने सालों तक कम वेतन और अस्थायी व्यवस्था में रहकर भी शिक्षा की लौ जलाए रखी। अब सवाल यह है कि क्या सरकार “गुरु दक्षिणा” कार्यक्रम की इस गूंज को सुनेगी और अतिथि शिक्षकों के लिए स्थायीत्व की ठोस राह बनाएगी, या फिर यह संघर्ष आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?