भोपाल: कॉलेजों में छात्रों की आत्महत्या रोकने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने तैयार किया विशेष एक्शन प्लान !

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भोपाल: मध्यप्रदेश में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों की आत्महत्या के मामलों में वृद्धि को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने एक विशेष एक्शन प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत अब टीचर्स छात्रों के पहले काउंसलर बनेंगे। इसका उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित न रहकर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की पहचान और समाधान करना है।


🔹 योजना का उद्देश्य और कानूनी आधार

यह पहल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और नेशनल टास्क फोर्स (NTF) की अनुशंसाओं के पालन के लिए लाई गई है। विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता सेमिनार में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्राचार्य, कुलसचिव और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा:

“सभी एजुकेशनल संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य केवल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।”


🔹 मुख्य निर्देश और उपाय

  1. काउंसलर और विशेष सेल की नियुक्ति:
    • हर संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं की पहचान और समाधान के लिए विशेष सेल और काउंसलर नियुक्त किया जाएगा।
    • शिक्षक छात्रों का पहला काउंसलर बनेंगे और उन्हें मानसिक तनाव के लक्षण पहचानने के प्रशिक्षण दिए जाएंगे।
  2. हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित:
    • परिसर में टेली मानस 14416, उमंग हेल्पलाइन 14425 और आपातकालीन नंबर 112 को प्रदर्शित किया जाएगा।
    • समय पर मदद मिलने से कई गंभीर स्थितियों को टाला जा सकता है।
  3. जागरूकता कार्यक्रम:
    • नियमित रूप से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    • जिला और संभाग स्तर पर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए सेमिनार और प्रशिक्षण आयोजित होंगे।
  4. आवासीय संस्थानों में चिकित्सा सुविधा:
    • 24×7 आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी या संस्थान से 1 किलोमीटर की दूरी के भीतर यह सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
  5. छात्रवृत्ति और रोजगार:
    • लंबित छात्रवृत्तियों का समय पर भुगतान किया जाएगा।
    • शिक्षण और गैर-शिक्षण रिक्त पदों को चार माह में भरा जाएगा और आरक्षित वर्गों के पदों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  6. सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र:
    • रैगिंग निरोधक व्यवस्था, समान अवसर प्रकोष्ठ, आंतरिक शिकायत समिति और छात्र शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
    • किसी भी छात्र की आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की सूचना तुरंत पुलिस को दी जाएगी और वार्षिक रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और नियामक संस्थाओं को भेजी जाएगी।
  7. कोचिंग संस्थानों की निगरानी:
    • बिना पंजीकरण कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं होगा।
    • हर जिले में जिला स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है।

🔹 विशेषज्ञों की राय

एमएलबी कन्या महाविद्यालय भोपाल की प्रोफेसर डॉ. अनिता पुरी ने कहा:

“शिक्षकों को छात्रों के मानसिक तनाव के शुरुआती लक्षण पहचानने होंगे। शिक्षक ही छात्र का पहला काउंसलर होता है।”

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सुमित राय ने सलाह दी:

“बच्चों पर सफलता का अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए।”

डॉ. काकोली राय और डॉ. अमित सोनी ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम संकेत और रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डाला।


🔹 स्टेट टास्क फोर्स का गठन

  • मध्यप्रदेश में स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया है।
  • अध्यक्ष: आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा
  • सदस्य सचिव: ओएसडी डॉ. उषा के. नायर
  • यह बहु-विभागीय टास्क फोर्स छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर समग्र रूप से काम करेगी।

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