भोपाल में एनिमल बाइट्स का खौफनाक आंकड़ा: 6 महीने में 13 हजार से ज्यादा लोग शिकार

Spread the love

भोपाल | 02 सितम्बर 2025
राजधानी भोपाल में एनिमल बाइट्स का खतरा लगातार बढ़ रहा है। साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही 13 हजार से ज्यादा लोग अलग-अलग जानवरों के काटने का शिकार हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले कुत्तों के काटने के सामने आए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इंसानों में होने वाले 90% से अधिक रेबीज संक्रमण के मामले जानवरों के काटने या खरोंचने से फैलते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि रेबीज एक बार लक्षण दिखाने के बाद लाइलाज हो जाता है।


90% रेबीज केस काटने या खरोंचने से

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को एडवाइजरी जारी कर कहा कि रेबीज संक्रमण को केवल समय पर टीकाकरण से ही रोका जा सकता है। गांधी मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. कुलदीप गुप्ता का कहना है—
“यह ऐसा रोग है जिसमें एक बार लक्षण आ गए तो इलाज बेअसर हो जाता है। इसलिए किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने के बाद तुरंत एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना ही जीवन बचाने का एकमात्र तरीका है।”


जेपी और हमीदिया अस्पतालों का डेटा

सिर्फ भोपाल के दो बड़े अस्पतालों—जेपी और हमीदिया—में जनवरी से जून 2025 के बीच 12,078 पुरुष और 9,286 महिलाएं एनिमल बाइट्स का शिकार बनीं।

  • इनमें से अकेले कुत्तों के काटने के मामले 19,345 तक पहुंचे।
  • बिल्लियों के काटने के भी कई केस दर्ज हुए।
  • बाकी मामले अन्य जानवरों के रहे।

जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। लेकिन करीब 45% लोग एनिमल बाइट को हल्के में लेते हैं
वे न तो घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोते हैं और न ही समय पर वैक्सीन लगवाते। यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित होती है।


बंदरों, चूहों और चमगादड़ों ने भी बढ़ाया खतरा

कुत्तों और बिल्लियों के अलावा भी कई अन्य जानवर लोगों के लिए परेशानी बने।

  • बंदरों के काटने के 213 केस
  • चूहों के काटने के 249 केस
  • चमगादड़ों के काटने के 10 केस
  • गिलहरी के 16 केस
  • खरगोश के 5 केस

विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इनकी संख्या कम हो, लेकिन संक्रमण का खतरा इनमें भी उतना ही घातक रहता है।


कैसे करें बचाव?

डॉक्टरों और स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ अहम सावधानियां बताई हैं:

  1. किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोएं
  2. तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं।
  3. संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण में देरी न करें।
  4. पालतू कुत्तों और बिल्लियों का नियमित टीकाकरण करवाएं।

बड़ा सवाल: क्यों बढ़ रहे एनिमल बाइट्स के केस?

  • शहरों में स्ट्रे डॉग्स (आवारा कुत्तों) की संख्या में बढ़ोतरी
  • कचरा प्रबंधन की कमी, जिससे कुत्ते-बंदर ज्यादा इकट्ठा होते हैं
  • जागरूकता का अभाव, लोग काटने को हल्के में लेते हैं
  • ग्रामीण इलाकों में वैक्सीन की पहुंच सीमित होना

निष्कर्ष

भोपाल और आसपास के इलाकों में एनिमल बाइट्स का बढ़ता आंकड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह सिर्फ एक मेडिकल इश्यू नहीं, बल्कि शहरी प्रबंधन, जनजागरूकता और पशु नियंत्रण से जुड़ा हुआ मामला है। रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी को सिर्फ और सिर्फ समय पर टीकाकरण और सतर्कता से रोका जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *