भोपाल के डीएवी विद्यालय परिसर में 21 दिसंबर से तीन दिवसीय प्रांतीय आर्य महासम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ। सम्मेलन की शुरुआत प्रातः वैदिक यज्ञ से की गई, जिसमें ब्रह्मा आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने यज्ञ संपन्न कराया। इस अवसर पर मोहन बड़ोदिया गुरुकुल की कन्याओं द्वारा किए गए मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक और वैदिक ऊर्जा से भर गया।

यज्ञ के महत्व पर प्रकाश
आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने यज्ञ के महत्व, उससे होने वाले आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि मानव जीवन को शुद्ध, संयमित और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि यज्ञ से वातावरण की शुद्धि के साथ-साथ मानव मन में भी सद्भाव और अनुशासन का विकास होता है।
ईश्वर एक है: स्वामी ऋतस्पति
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे स्वामी ऋतस्पति ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि ईश्वर एक है और उसी की उपासना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर की सच्ची आराधना और प्रार्थना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है तथा समाज में नैतिक मूल्यों का विकास होता है।
ओम् ध्वजारोहण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
यज्ञ के उपरांत ‘ओम्’ ध्वजारोहण का आयोजन स्वामी ऋतस्पति की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर प्रांतीय सभा के प्रधान प्रकाश आर्य, पूर्व प्रधान इंद्रप्रकाश गांधी, सभा सचिव अतुल वर्मा सहित अनेक पदाधिकारी एवं आर्यजन उपस्थित रहे। गुरुकुल की कन्याओं ने ओम् ध्वज गीत की सुंदर प्रस्तुति दी, वहीं आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने ‘ओम्’ की गूढ़ और सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण
द्वितीय सत्र से पूर्व हरिओम सरल और दिलीप आर्य द्वारा प्रस्तुत भजनों ने सम्मेलन स्थल को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। श्रोताओं ने भजन संध्या का भरपूर आनंद लिया।
आर्य समाज समाज को दिशा दे रहा है: आलोक संजय
द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद आलोक संजय ने आर्य समाज की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि आर्य समाज समाज में ज्योत से ज्योत जलाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति, संस्कार और वैदिक मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
सनातन धर्म कभी समाप्त नहीं हो सकता: आचार्य योगेंद्र याज्ञिक
मुख्य वक्ता आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने “सनातन धर्म और आर्य समाज” विषय पर संबोधन देते हुए कहा कि परमेश्वर ने सृष्टि की रचना के साथ ही मानव कल्याण के लिए चार वेदों के माध्यम से शुद्ध ज्ञान प्रदान किया। यह ज्ञान न नया है, न पुराना, बल्कि सनातन है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को समाप्त करने की बात करने वालों को पहले ईश्वर को समाप्त करना होगा, जो असंभव है। इसलिए सनातन धर्म भी कभी समाप्त नहीं हो सकता। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वेद हमारे ज्ञान का अमूल्य भंडार हैं और समाज को वेदों की ओर लौटने की आवश्यकता है।

आर्य समाज का उद्देश्य संसार का उपकार: स्वामी ऋतस्पति
अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी ऋतस्पति ने कहा कि आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य संसार का उपकार करना है। उन्होंने देश की संस्कृति और मूल्यों की रक्षा के लिए समाज को सजग रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को भव्य बना सकते हैं, लेकिन देश को दिव्य और महान बनाने का कार्य आर्य समाज कर सकता है।
महिला सम्मेलन में विचार मंथन
सम्मेलन के तीसरे सत्र में महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं महू विधायक उषा ठाकुर ने की। इस सत्र में महिला स्वतंत्रता और स्वच्छंदता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई।
आयोजन में सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में संयोजक विजय अग्रवाल और संरक्षक दिनेश अग्रवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। स्वागत उद्बोधन एवं आयोजन से संबंधित जानकारी प्रधान प्रकाश आर्य ने दी। कार्यक्रम का सफल संचालन सचिव अतुल वर्मा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन दक्ष देव गौड़ ने किया।