भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हाल ही में बांग्लादेशी अवैध प्रवासी मजदूरों को शहर में लाकर जानवर काटने और हलाल प्रोसेसिंग के कार्यों पर लगाया गया है। इस कदम के कारण स्थानीय अनुसूचित जाति के मजदूर, जो इस काम पर अपनी रोजी-रोटी निर्भर करते थे, बेरोजगार हो गए हैं।
मानवाधिकारों की चिंता
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ने के साथ-साथ उनके मानवाधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है।

प्रियंक कानूनगो ने इस विषय पर भोपाल पुलिस को नोटिस जारी किया था, लेकिन पुलिस का जवाब उनके अनुसार संतोषजनक नहीं रहा। कानूनगो ने कहा कि वेरिफिकेशन तब ही संभव होगा जब नगर निगम आवेदन करेगा।
सोशल मीडिया पर जताई चिंता
प्रियंक कानूनगो ने इस मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि “बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों को भोपाल लाया गया है, जहां उन्हें जानवर काटने और हलाल प्रोसेसिंग के काम पर लगाया जा रहा है। इससे स्थानीय अनुसूचित जाति के मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। भोपाल पुलिस को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं था।”
मुद्दे की गंभीरता
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम स्थानीय मजदूरों के रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। मानवाधिकारों की दृष्टि से भी यह मामला संवेदनशील है, क्योंकि मौजूदा नियमों के तहत किसी भी विदेशी या अवैध प्रवासी को रोजगार देने के लिए उचित वेरिफिकेशन और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
आगे की कार्रवाई
भोपाल प्रशासन और पुलिस को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने और स्थानीय मजदूरों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। वहीं, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की निगरानी में मामले की सटीक जांच और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है।
इस घटना से शहर में रोजगार और मानवाधिकारों के प्रति सवाल उठ रहे हैं, और यह विषय आगामी दिनों में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बनेगा।