भोपाल।
राजधानी भोपाल के शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर में मंगलवार को एक ऐतिहासिक पहल की गई। यहां थायरॉइड और मोटापा (हाइपोथायरायडिज्म व ओबेसिटी) यूनिट की शुरुआत हुई है। यह न केवल मध्यप्रदेश की, बल्कि देश की पहली यूनिट है, जहां मरीजों को केमिकल-फ्री, सुरक्षित और लंबे समय तक असरदार इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
यह यूनिट भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और केंद्रीय होम्योपैथी रिसर्च काउंसिल की संयुक्त पहल पर शुरू की गई है। इसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों, सहायक चिकित्सकों और लैब एक्सपर्ट्स की टीम काम करेगी, जो न केवल इलाज देगी बल्कि थायरॉइड और मोटापे से जुड़ी जटिलताओं पर रिसर्च भी करेगी।

बढ़ती भागदौड़ और बदलती जीवनशैली ने बढ़ाई समस्या
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एस.के. मिश्रा के अनुसार, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थायरॉइड और मोटापा बेहद सामान्य समस्या बन चुकी है। खासकर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित होती हैं।
- लंबे समय तक रासायनिक दवाओं के सेवन से मरीजों का वजन बढ़ जाता है।
- कई बार हड्डियों और जोड़ों की कमजोरी जैसी गंभीर परेशानियां भी सामने आती हैं।
- गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव को बीमारी मानकर दवा देना भी महिलाओं को जीवनभर दवाओं पर निर्भर बना देता है।
डॉ. मिश्रा का कहना है कि होम्योपैथी शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने का मार्ग प्रशस्त करती है। यही इस यूनिट की सबसे बड़ी विशेषता है।
केमिकल दवाओं से दूरी, सुरक्षित भविष्य की ओर कदम
डॉक्टरों का कहना है कि थायरॉइड की ऑलोपैथिक दवाएं लगातार लेने पर वजन बढ़ने और अन्य साइड इफेक्ट्स का खतरा रहता है। वहीं होम्योपैथी इलाज इस जोखिम को कम करता है।
यूनिट का लक्ष्य सिर्फ बीमारी खत्म करना नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
यहां मरीजों को सिर्फ दवा नहीं, बल्कि डाइट चार्ट और एक्सरसाइज की सलाह भी दी जाएगी ताकि उपचार का असर स्थायी हो।

अत्याधुनिक सुविधाएं और मुफ्त इलाज
नई यूनिट को आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है।
- फुल बॉडी एनालाइजर मशीन से मरीजों की पूरी शारीरिक जांच की जाएगी।
- रोजाना सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक पंजीयन और इलाज की सुविधा रहेगी।
- इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा।
- जानकारी और अपॉइंटमेंट के लिए 0755-2992970 नंबर जारी किया गया है।
महिलाओं पर खास फोकस
यूनिट की प्रभारी डॉ. जूही गुप्ता के अनुसार, थायरॉइड और मोटापा महिलाओं में सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं।
- अगर समय पर इलाज न हो तो यह 50 वर्ष की उम्र के बाद गंभीर हड्डी और जोड़ रोग का कारण बन सकता है।
- गर्भवती महिलाओं को भी अनावश्यक दवाओं से बचाने पर जोर रहेगा।
इसलिए यूनिट में महिलाओं और युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

भोपाल से राष्ट्रीय विस्तार की तैयारी
अभी यह यूनिट भोपाल के साथ देश के 5 अन्य शहरों में भी शुरू की गई है। आयुष मंत्रालय की योजना है कि इसे चरणबद्ध तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जाए, ताकि थायरॉइड और मोटापे जैसी गंभीर समस्याओं का प्राकृतिक और सुरक्षित इलाज अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।