भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर को धार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शुरू किए गए “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार को सशक्त बनाना है। इस अभियान के तहत नेत्रहीनता नियंत्रण, वृद्धजन देखभाल, ओरल हेल्थ (मुंह और दांत रोग) और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष फोकस किया जाना था।
लेकिन, अभियान के पांचवें दिन सोमवार को राजधानी भोपाल के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निरीक्षण करने पर स्थिति निराशाजनक मिली।

डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति
- कोलार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र: मानसिक स्वास्थ्य के लिए बनाए गए “मन कक्ष” में डॉक्टर और स्टाफ गायब मिले। सुबह साढ़े 11 बजे जब अभियान टीम ने केंद्र का दौरा किया, तो कक्ष पूरी तरह खाली था।
- 1100 क्वार्टर मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक: नेत्र जांच कक्ष और नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (कैंसर) परामर्श कक्ष से स्टाफ नदारद था। जबकि सीएमएचओ कार्यालय ने इन केंद्रों में नियमित से अधिक फोकस करने के आदेश जारी किए थे।
ओपीडी की खिड़की पर न तो कोई स्टाफ उपस्थित था और न ही अस्पताल में डॉक्टर नजर आए।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता
प्रधानमंत्री मोदी ने अभियान की शुरुआत के दौरान स्पष्ट किया था कि जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ा जाए। उन्हें खुद जांच कराने और अधिक से अधिक लोगों को हेल्थ सेंटर तक लाने के लिए प्रेरित करना था।
लेकिन पांच दिन बाद भी जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी नहीं देखी गई। स्वास्थ्य केंद्रों में न प्रचार हो रहा है और न ही सख्त मॉनिटरिंग।
इस कारण अभियान केवल कागजों और बैनरों तक सीमित रह गया।

पहले दिन की तुलना और वास्तविक स्थिति
- अभियान के पहले दिन, 140 केंद्रों पर 20 हजार लोगों की जांच की गई थी।
- अधिकारियों ने इसे महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए लाभकारी बताया था।
- पांचवें दिन की निरीक्षण रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि अभियान की वास्तविक सफलता सुनिश्चित करने में गंभीर कमियाँ हैं।
विशेषज्ञ और नागरिक दृष्टिकोण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की उदासीनता से न केवल अभियान के उद्देश्यों पर असर पड़ता है, बल्कि आम जनता का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।
स्थानीय नागरिकों ने शिकायत की कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जाने पर उन्हें डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति का सामना करना पड़ता है। कई लोग, जो नेत्र और दांत रोग जैसी सामान्य समस्याओं के इलाज के लिए केंद्र पर आए थे, निराश होकर लौट गए।
भावनात्मक पहलू
अभियान का उद्देश्य महिलाओं और परिवारों को सशक्त बनाना है, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और स्टाफ की अनुपस्थिति ने इसे सिर्फ प्रतीकात्मक बनाकर रह दिया है।
यदि समय रहते सख्त मॉनिटरिंग और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो अभियान के वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाएंगे।

सारांश
- अभियान: स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार।
- उद्देश्य: महिलाओं और परिवारों का स्वास्थ्य सुधार, मानसिक स्वास्थ्य, नेत्र और ओरल हेल्थ पर फोकस।
- निरीक्षण: 5वें दिन भोपाल के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और स्टाफ अनुपस्थित।
- जनप्रतिनिधियों की उदासीनता, प्रचार और मॉनिटरिंग की कमी।
- निष्कर्ष: अभियान केवल कागजों और बैनरों तक सीमित, वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाया।