भोपाल से दो तस्वीरें: एक उम्मीद, दूसरी चिंता – तंबाकू मुक्त अभियान आगे, लेकिन बस्तियों में बढ़ता खतरा

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भोपाल में तंबाकू को लेकर दो तस्वीरें साथ सामने आई हैं। एक उम्मीद जगाती है, तो दूसरी चिंता बढ़ा देती है। उम्मीद इसलिए कि तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 के तहत शहर के 287 स्कूलों और 31 गांवों को तंबाकू मुक्त घोषित कर दिया गया है, जबकि 400 स्कूलों के लक्ष्य की ओर काम जारी है। हजारों बच्चों को तंबाकू से दूर रखने के लिए जागरूकता, प्रतियोगिताएं, शपथ और स्कोरिंग आधारित सर्टिफिकेशन जैसी पहल की जा रही हैं।

लेकिन, इसी बीच NIREH और एम्स भोपाल के संयुक्त अध्ययन ने एक चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया है। शहर के स्लम इलाकों में हर 1 किलोमीटर के दायरे में औसतन 59 तंबाकू दुकानें मौजूद हैं, जिनमें से 80% बिना लाइसेंस चल रही हैं और 43% स्कूलों के पास हैं। यह विरोधाभास बताता है कि जहां एक ओर बच्चे तंबाकू मुक्त भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं आसपास का माहौल उनकी सेहत को गंभीर खतरे में डाल रहा है।

स्कूल में बनाए टोबैको मॉनिटर अभियान की खास बात यह है कि हर स्कूल में एक टोबैको मॉनिटर चुना जाता है। यह मॉनिटर शिक्षक और स्वास्थ्य विभाग की टीम की मदद से यह सुनिश्चित करता है कि स्कूल में कोई भी छात्र तंबाकू का सेवन न करे और न ही परिसर के आसपास तंबाकू मिले। टोबैको मॉनिटर न केवल निगरानी करते हैं बल्कि अपने साथियों को भी जागरूक करते हैं। कई स्कूलों में छात्र स्वयं प्रेरित होकर अपने दोस्तों को तंबाकू छोड़ने की सलाह देते हैं और इस अभियान को एक छात्र–आंदोलन का रूप दे रहे हैं।

100 अंकों पर मिलता है तंबाकू मुक्त सर्टिफिकेट स्कूल को तंबाकू मुक्त घोषित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम 9 बिंदुओं पर आधारित 100 अंकों का मूल्यांकन करती है। इसमें परिसर में तंबाकू के उपयोग के कोई प्रमाण न मिलना, छात्रों और शिक्षकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, परिसर के बाहर 100 गज के दायरे में तंबाकू दुकान न होना, तंबाकू मॉनिटर नियुक्त होना, स्कूल में “नो टोबैको” बोर्ड लगाया जाना और पीक के धब्बे, पाउच और बीड़ी के टुकड़े न मिलना शामिल हैं। इन सभी बिंदुओं पर स्कूल स्कोरिंग पूरी करता है तभी उसे तंबाकू मुक्त विद्यालय घोषित किया जाता है।

स्कूल के मूल्यांकन के बाद उसके प्रिंसिपल द्वारा स्व-घोषणा पत्र दिया जाता है कि संस्थान COTPA एक्ट की धारा 4-6B का पालन करेगा। इसके बाद स्कूल की बाउंड्रीवॉल के आसपास पीली लाइन खींचकर उसे तंबाकू मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाता है।

CMHO डॉ. मनीष शर्मा के अनुसार अभियान में स्कूल शिक्षा विभाग का सहयोग प्रभावी है और इसका उद्देश्य केवल बच्चों को नहीं, बल्कि पूरे समाज को तंबाकू के खिलाफ एकजुट करना है।

31 गांव भी हुए तंबाकू मुक्त अभियान सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है। जिले के 31 गांवों को भी तंबाकू मुक्त गांव घोषित किया गया है। ग्रामसभा में प्रस्ताव पास कर ग्रामीणों से तंबाकू त्यागने की शपथ ली गई। यह मॉडल राज्य के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।

राजधानी की बस्तियों में हर 1 किमी पर 59 तंबाकू दुकानें जब स्कूल तंबाकू मुक्त भविष्य का निर्माण कर रहे हैं, उसी शहर की एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट भी है। NIREH और एम्स भोपाल का संयुक्त अध्ययन बताता है कि स्लम क्षेत्रों के 40% वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं। 31 से 44 वर्ष का युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। सर्वे में शामिल 194 दुकानों में से केवल 18% लाइसेंस प्राप्त थीं। 43% दुकानें स्कूलों के 100 मीटर दायरे में हैं। हर 1 किमी के दायरे में औसतन 59 तंबाकू दुकानें मिलती हैं। स्लम में तंबाकू की उपलब्धता दूसरी बड़ी वजह है जिसकी वजह से लत तेजी से फैल रही है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह स्थिति आने वाले वर्षों में मुंह, फेफड़े और गले के कैंसर को और बढ़ा सकती है।

तंबाकू की लत है संकट का कारण

  • महिलाओं में चबाने वाला तंबाकू अधिक प्रचलित है।
  • पुरुष धूम्रपान को प्राथमिकता देते हैं।
  • तंबाकू सेवन से कैंसर, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारियों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
  • वैश्विक स्तर पर हर साल 80 लाख मौतें तंबाकू के कारण होती हैं।
  • परिवारों पर मानसिक और आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।

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