मंत्री गोविन्द सिंह की पहल पर केंद्र का बड़ा फैसला, अब PDS के तहत 75% गेहूं, 25% चावल का वितरण!

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जनता की मांग हुई पूरी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव का रास्ता साफ

मध्यप्रदेश के गरीब और वंचित वर्ग के लिए खाद्य सुरक्षा को और अधिक उपयोगी एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय हुआ है। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के आग्रह पर केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में गेहूं और चावल के वितरण अनुपात को संशोधित करते हुए अब 75:25 कर दिया है। यानी अब प्रदेश के पात्र हितग्राहियों को 75 प्रतिशत गेहूं और 25 प्रतिशत चावल मिलेगा। अभी तक यह अनुपात 60:40 था!

प्रदेश में लंबे समय से यह मांग उठती रही कि चावल की अपेक्षा गेहूं का उपयोग अधिक है, लिहाजा पीडीएस में गेहूं की मात्रा बढ़ाई जाए। लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के सतत प्रयासों और जनता की भावना को सही मंच पर प्रभावशाली ढंग से रखने के कारण यह मांग अब नीतिगत बदलाव के रूप में साकार हो सकी है। राज्य में जनता की जरूरतों और व्यवहारिक उपयोग को ध्यान में रखते हुए श्री राजपूत ने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में चावल की अपेक्षा गेहूं की मांग अधिक है, और अतिरिक्त चावल अक्सर अनुपयोगी या दुरुपयोग की स्थिति में चला जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हितग्राहियों को उनकी पसंद और जरूरत के अनुसार अनाज मिले, तो पीडीएस व्यवस्था और अधिक पारदर्शी, उपयोगी और प्रभावी बन सकती है।


खास बात यह रही कि खाद्य मंत्री राजपूत की बातों को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने समसामयिक और व्यावहारिक मानते हुए मात्र एक सप्ताह में इस पर त्वरित सहमति दे दी। यह दर्शाता है कि यदि राज्य सरकार की मांग तर्कसंगत हो और नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो, तो नीतिगत बदलाव भी संभव हैं


खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की इस पहल को अब केंद्र-राज्य समन्वय का एक सशक्त उदाहरण माना जा रहा है। यह निर्णय न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी दिशा निर्धारक बन सकता है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को हितग्राही केंद्रित और व्यावहारिक बनाने की दिशा में भी राज्य सरकारें प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।


मध्यप्रदेश के कई जिलों में जनता ने खुले मंचों, जनसंवाद कार्यक्रमों और क्षेत्रीय दौरों के दौरान खाद्य मंत्री से आग्रह किया था कि उन्हें चावल की जगह अधिक गेहूं की आवश्यकता है। मंत्री राजपूत ने इस मांग को जनसरोकार की आवाज माना और उसे केंद्रीय स्तर तक पहुंचाया।


श्री राजपूत का मानना है कि नई व्यवस्था के तहत अब गेहूं को प्राथमिकता देने से न सिर्फ हितग्राहियों को वास्तविक उपयोग में आने वाला अनाज मिलेगा, बल्कि पीडीएस प्रणाली में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि सरकार अब आधार प्रमाणीकरण, ई-केवाईसी और डिजिटल वितरण ट्रैकिंग जैसे तकनीकी उपायों को तेजी से लागू कर रही है ताकि प्रणाली और अधिक जवाबदेह बन सके।


खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस अहम निर्णय पर श्री राजपूत ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार – केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में – जनहित के लिए हर जरूरी निर्णय को प्राथमिकता देती है और त्वरित अमल करती है।


राजपूत ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में पीडीएस व्यवस्था में और सुधार किए जाएंगे। चाहे वह खाद्यान्न उपार्जन हो, भंडारण हो या वितरण – हर स्तर पर पारदर्शिता, दक्षता और उपयोगिता को केंद्र में रखकर कार्य किए जाएंगे।


यह निर्णय दर्शाता है कि यदि नेतृत्व में जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता, नीति के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता हो, तो सालों से लंबित मांगें भी पूरी की जा सकती हैं। गोविंद सिंह राजपूत की यह पहल अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लिए नजीर बनेगी।


👉 इस निर्णय से प्रदेश के करोड़ों हितग्राहियों को सीधा लाभ मिलेगा और खाद्य सुरक्षा योजना और अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बन सकेगी।

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