मऊगंज में जमीन विवाद पर भाजपा विधायक की एंट्री से हंगामा, पुलिस ने सुरक्षित स्थान पर हटाया !

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मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले में लम्बे समय से चल रहे जमीन विवाद के दौरान भाजपा विधायक प्रदीप पटेल की एंट्री से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मामला मऊगंज थाना क्षेत्र के बराब मोड़ का है, जहां लल्लू पांडे और विनोद खोडबानी के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। रविवार रात लगभग 9 बजे नेशनल हाईवे-135 पर विवाद का झगड़ा तेज हो गया, जब विधायक मौके पर पहुंचे और कथित तौर पर एक पक्ष के समर्थन में धरने पर बैठ गए।

विधायक की एंट्री से भड़की भीड़

विधायक के धरने पर बैठते ही सैकड़ों लोग मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों का कहना था कि यह दो पक्षकारों का निजी जमीन विवाद है और विधायक की दखलअंदाजी से हालात बिगड़ गए। गुस्साई भीड़ ने विधायक के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आरोप लगा कि विधायक के कहने पर पुलिस एक पक्षकार को हिरासत में लेने की तैयारी कर रही थी।

नेशनल हाईवे पर हंगामा और आवागमन प्रभावित

हंगामा बढ़ने के कारण नेशनल हाईवे-135 पर आवागमन बाधित हो गया। तनावपूर्ण माहौल के बीच लल्लू पांडे ने आत्मदाह की चेतावनी भी दी, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।

दूसरे पक्ष का दावा

विनोद खोडबानी ने कहा कि विवादित जमीन उनकी पुश्तैनी है और वे इसके वैध पट्टेदार हैं। उन्होंने बताया कि कब्जे की कोशिश और धमकियों के बाद उन्होंने विधायक को जानकारी दी थी। उनका कहना था कि विधायक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से मौके पर आए थे।

विधायक ने आरोपों को किया खारिज

भाजपा विधायक प्रदीप पटेल ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि वे केवल विवाद को शांत कराने पहुंचे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़ा मामला तहसीलदार स्तर पर विचाराधीन है और अंतिम फैसला प्रशासन और न्यायालय करेगा। विधायक ने 10 लाख रुपए की मांग से जुड़े आरोपों को भी पूरी तरह झूठा और निराधार बताया।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

करीब दो घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला और विधायक को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर हालात पर काबू पाया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

हनुमना ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र मिश्रा ने भाजपा विधायक प्रदीप पटेल को भू-माफिया बताते हुए आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में लंबित जमीन मामले में विधायक ने गैरकानूनी दखल दी। उन्होंने इसे कानून व्यवस्था और लोकतंत्र पर हमला बताया।

यह घटना मऊगंज जिले में राजनीतिक हस्तक्षेप और निजी जमीन विवादों के बीच तनावपूर्ण स्थिति को उजागर करती है, जिससे इलाके में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संवेदनशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

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