वाराणसी-गोरखपुर हाईवे पर खड़े ट्रेलर में घुसी इनोवा, पीछे बैठे ड्राइवर की हालत गंभीर
मऊ। एक दर्दनाक सड़क हादसे ने अकादमिक जगत को गहरे शोक में डाल दिया है। महाराष्ट्र के कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक के कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी (58) और उनकी पत्नी बदामी देवी (52) की शनिवार सुबह सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसा मऊ जिले के दोहरीघाट थाना क्षेत्र में वाराणसी-गोरखपुर हाईवे (NH-29) पर अहिरानी बुजुर्ग पेट्रोल पंप के पास हुआ।

सुबह करीब 7 बजे प्रो. त्रिपाठी अपनी पत्नी और ड्राइवर वैभव मिश्रा (28) के साथ वाराणसी से अपने पैतृक घर कुशीनगर लौट रहे थे। बताया जाता है कि जैसे ही गाड़ी मऊ के करीब पहुंची, ड्राइवर को झपकी आने लगी। इस पर कुलपति ने ड्राइवर को पीछे जाकर आराम करने को कहा और खुद स्टीयरिंग संभाल ली। कुछ ही मिनटों में यह यात्रा त्रासदी में बदल गई—इनकी इनोवा अचानक बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में पीछे से जा घुसी।

हादसे की विभीषिका
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एयरबैग खुलने के बावजूद प्रो. त्रिपाठी की जान नहीं बच सकी। उनकी पत्नी बदामी देवी ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी, जिससे वे झटके से सीट से नीचे गिर गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। गाड़ी की हालत इतनी बुरी हो गई कि पुलिस को गैस कटर से गेट काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।
घायल ड्राइवर वैभव मिश्रा ने बताया—
“मुझे झपकी आ रही थी, तो सर (कुलपति) ने कहा कि तुम पीछे बैठकर थोड़ी देर सो जाओ। मैं सो गया और तभी हादसा हो गया। होश आने पर देखा कि सर और मैडम हिल नहीं रहे थे। मैंने किसी तरह फोन कर पुलिस को खबर दी।”
पुलिस की कार्रवाई
ASP अनूप कुमार ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों व घायल ड्राइवर को बाहर निकाला गया। परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि परिजनों की ओर से तहरीर मिलने के बाद ट्रेलर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
प्रो. त्रिपाठी मूल रूप से कुशीनगर जिले के चौरा थाना क्षेत्र के मोहनपुर चकिया गांव के निवासी थे। वे अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। पीछे उनका बड़ा परिवार है—
- बड़ा बेटा राजन (36) सॉफ्टवेयर इंजीनियर,
- मंझला बेटा विनय (32) प्रोफेसर,
- सबसे छोटा बेटा गोपाल (28) जो लंबे समय से बीमार है और बिस्तर पर रहता है।
इसके अलावा तीन बेटियां हैं—
- बड़ी बेटी वंदना (34) की शादी हो चुकी है,
- जबकि पुनीता (26) और अर्चना (20) फिलहाल पढ़ाई कर रही हैं।
मां-बाप की अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

शिक्षा जगत को बड़ा नुकसान
प्रो. हरेराम त्रिपाठी संस्कृत साहित्य की दुनिया में बड़ा नाम थे। उनके निर्देशन में 19 छात्रों ने पीएच.डी. और 6 छात्रों ने विशिष्टाचार्य की उपाधि प्राप्त की। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा महर्षि बादरायण व्यास सम्मान से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्होंने शंकर पुरस्कार, विशिष्ट पुरस्कार (2018), और सरयूरत्न पुरस्कार भी हासिल किया था।
उनका जाना न केवल विश्वविद्यालय के लिए बल्कि पूरे संस्कृत साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

संयोग या दुर्भाग्य?
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भी वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. विद्यानिवास मिश्र की भी 2005 में दोहरीघाट इलाके में सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। उनकी कार पेड़ से टकरा गई थी। अब उसी क्षेत्र में प्रो. हरेराम त्रिपाठी का जाना एक दुर्भाग्यपूर्ण संयोग माना जा रहा है।
अंतिम संस्कार की तैयारी
हादसे की सूचना मिलते ही गांव और विश्वविद्यालय में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के लोग मऊ पहुंचे। दोनों का अंतिम संस्कार रविवार को उनके पैतृक गांव कुशीनगर में किया जाएगा।