प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, शासकीय महाविद्यालय मकरोनिया बुजुर्ग में मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग एवं नेशनल हेल्थ मिशन के संयुक्त तत्वावधान में उमंग उच्च शिक्षा हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर स्वास्थ्य और जागरूकता से ओतप्रोत रहा, जहाँ लगभग 239 विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराकर लाभ उठाया।

कार्यक्रम का शुभारंभ
शिविर का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. ए.सी. जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। यह केवल बीमारी से मुक्त होना नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक संतुलन है, जो जीवन की गुणवत्ता और सफलता को सीधे प्रभावित करता है।” उनके शब्दों ने छात्रों के मन में स्वास्थ्य के महत्व को गहराई से अंकित किया।
स्वास्थ्य परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श
शिविर में आमंत्रित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने विद्यार्थियों का अनीमिया परीक्षण, ब्लड प्रेशर जांच, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), ओरल स्क्रीनिंग, आई स्क्रीनिंग और सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने छात्रों को न केवल रोगों की पहचान बल्कि उनके रोकथाम के उपाय भी बताए। कई विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी प्रारंभिक चेतावनियाँ मिलीं, जिससे वे आगे बेहतर जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित हुए।
मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष सत्र
आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। इस दृष्टि से उमंग काउंसलर सुश्री काजल ठाकुर और सुश्री सोनम दुबे ने विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और मानसिक परामर्श सेवाओं के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में प्रतिस्पर्धा, लक्ष्य और दबाव के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि विद्यार्थी मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे तो वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकेंगे।
कार्यक्रम का संचालन और सहयोग
कार्यक्रम का संचालन उमंग कार्यक्रम नोडल अधिकारी श्री जितेन्द्र राजपूत ने प्रभावशाली ढंग से किया। वहीं, आभार प्रदर्शन उमंग कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मि यादव ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ की उपस्थिति उल्लेखनीय रही, जिन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और सकारात्मक जीवनशैली अपनाएं।
विद्यार्थियों की सहभागिता
करीब 239 विद्यार्थियों ने इस स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में भाग लेकर अपने स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की। अधिकांश छात्र-छात्राओं ने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताया। उनका कहना था कि इस तरह के शिविर न केवल बीमारियों की समय रहते पहचान कराते हैं बल्कि छात्रों को स्वास्थ्य के प्रति सजग भी बनाते हैं।
आयोजन का महत्व
यह आयोजन विद्यार्थियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम साबित हुआ। उच्च शिक्षा विभाग और नेशनल हेल्थ मिशन की यह संयुक्त पहल इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा केवल पुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास शामिल है।
मकरोनिया बुजुर्ग के इस शिविर ने स्पष्ट कर दिया कि यदि शिक्षा के साथ स्वास्थ्य जागरूकता जुड़ जाए, तो समाज और राष्ट्र का भविष्य और भी सशक्त हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव जीवनपर्यंत यादगार रहेगा और उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की प्रेरणा देता रहेगा।