मड़ियादो क्षेत्र के पीटीआर (पन्ना टाइगर रिजर्व) के जंगलों में इन दिनों दुर्लभ माने जाने वाले Sterculia urens के पेड़ फूलों से लदे नजर आ रहे हैं। पतझड़ी वन क्षेत्रों में पाए जाने वाला यह वृक्ष अपनी हल्के पीले-सफेद रंग की चिकनी छाल के कारण विशेष पहचान रखता है। चांदनी रात में चमकने जैसा आभास देने के कारण स्थानीय लोग इसे “घोस्ट ट्री” भी कहते हैं।
जंगलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है यह वृक्ष
वन विशेषज्ञों के अनुसार यह वृक्ष मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन क्षेत्रों में पाया जाता है। मड़ियादो क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों इस वृक्ष पर फूलों की बहार देखने को मिल रही है, जिससे वनस्पति प्रेमियों और पर्यटकों का ध्यान भी इसकी ओर आकर्षित हो रहा है।
औषधीय और औद्योगिक उपयोग में महत्वपूर्ण

विशेषज्ञ बताते हैं कि घोस्ट ट्री से निकलने वाला गोंद काफी उपयोगी होता है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों में किया जाता है।
यह गोंद आइसक्रीम, जेली, कॉस्मेटिक उत्पाद और कागज उद्योग में भी कच्चे माल के रूप में उपयोग होता है। प्राकृतिक गोंद होने के कारण इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।
वन संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण प्रजाति
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह वृक्ष पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। जंगलों में इसकी मौजूदगी वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास और खाद्य श्रृंखला को बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।
विशेषज्ञों की सलाह
वन विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रजाति के पेड़ों का संरक्षण जरूरी है, क्योंकि अत्यधिक दोहन से इनकी संख्या प्रभावित हो सकती है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि पेड़ों को नुकसान न पहुंचाएं और जंगल संरक्षण में सहयोग करें।
मड़ियादो क्षेत्र में घोस्ट ट्री के फूलों की बहार वन क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा रही है। वन विभाग भी इस प्रजाति के संरक्षण और निगरानी पर विशेष ध्यान दे रहा है।