मदनपुर प्राथमिक शाला की छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राएं घायल – कलेक्टर ने जिम्मेदार अधिकारियों पर की तत्काल कार्रवाई!

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सागर, रहली – 24 जून 2025 – विकासखंड रहली के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला मदनपुर में आज एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। शासकीय प्राथमिक शाला मदनपुर की जर्जर छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राएं घायल हो गईं। घटना के बाद जिला प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए हैं।

कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी श्री अरविंद जैन, जिला परियोजना अधिकारी श्री गिरीश मिश्रा, बीआरसी रहली श्री आर.डी. अहिरवार, प्रभारी सहायक यंत्री श्री पी.के.दास, उपयंत्री जनपद शिक्षा केन्द्र रहली श्री राजेन्द्र वैद्य तथा विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती रश्मि बनवारिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में सभी शासकीय एवं अशासकीय प्राथमिक/माध्यमिक शालाओं की स्थिति का मूल्यांकन कर जो भवन जीर्ण-शीर्ण अथवा क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं, उन्हें तुरंत गिराने के निर्देश स्पष्ट रूप से दिए गए थे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा इन निर्देशों की अवहेलना करते हुए आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिसके फलस्वरूप दिनांक 24 जून 2025 को यह दुखद घटना घटित हुई।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि यह लापरवाही न केवल बच्चों की जान जोखिम में डालने वाली है, बल्कि यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। इस कृत्य को प्रशासन ने स्वैच्छाचारिता एवं कर्तव्य से विमुख होने के रूप में देखा है।

कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने स्पष्ट किया है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। साथ ही सभी को तीन दिवस के भीतर कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक प्रतिउत्तर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि निर्धारित समयावधि में उत्तर प्राप्त नहीं होता है या प्रस्तुत उत्तर अस्वीकार्य पाया जाता है, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद घायल छात्राओं को प्राथमिक उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

यह घटना एक बार फिर सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और संबंधित अधिकारियों की निष्क्रियता की ओर इशारा करती है। प्रशासन द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई आने वाले समय में शिक्षा विभाग में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

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