मध्य प्रदेश के सागर सहित पूरे प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से “मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति 2026” लागू की गई है। इस नीति के तहत राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य मछली पालन को एक लाभकारी और संगठित उद्योग के रूप में विकसित करना है।
मत्स्य उद्योग को मिलेगा नया बढ़ावा
राज्य सरकार द्वारा 2 मार्च 2026 को लिए गए मंत्री परिषद के निर्णय के अनुसार इस नई नीति को लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मत्स्य उत्पादन में वृद्धि, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

प्रमुख योजनाएं और उनकी लागत
इस नीति के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण इकाइयों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है—
- हैचरी निर्माण इकाई – लागत लगभग ₹25 लाख
- फिश सीड रियरिंग यूनिट – लागत ₹7 लाख
- फिश फीड मिल (2 टन क्षमता) – लागत ₹30 लाख
- केज कल्चर यूनिट – प्रति केज ₹3 लाख
- लैंडिंग सेंटर – डीपीआर के अनुसार
- रेफ्रिजरेटेड वाहन व लाइव फिश वेंडिंग सेंटर – ₹20 से ₹25 लाख
- आइस प्लांट एवं कोल्ड स्टोरेज (10 टन क्षमता) – ₹40 लाख
- स्मार्ट फिश पार्लर – प्रति इकाई ₹5 लाख
इन योजनाओं के माध्यम से मछली उत्पादन से लेकर उसके भंडारण, परिवहन और बिक्री तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
सब्सिडी का प्रावधान
इस नीति के तहत विभिन्न वर्गों के लिए अनुदान (सब्सिडी) का विशेष प्रावधान किया गया है—
- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) एवं महिला वर्ग को 60% अनुदान
- सामान्य वर्ग (पुरुष) को 40% अनुदान
यह अनुदान प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की गाइडलाइन के अनुरूप दिया जाएगा।
आवेदन की प्रक्रिया
जो भी इच्छुक व्यक्ति, समिति या समूह इन योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है।
आवेदन सहायक संचालक, मत्स्य उद्योग कार्यालय, सागर में कार्यालयीन समय में जमा किए जा सकते हैं।

रोजगार और आय के नए अवसर
इस नीति से न केवल मछली उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेष रूप से युवाओं और महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।
मध्यप्रदेश की यह नई मत्स्य उद्योग नीति 2026 राज्य के आर्थिक विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजनाओं में दी जा रही सब्सिडी और आधुनिक सुविधाओं के जरिए मत्स्य पालन को एक मजबूत और लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकेगा।
यदि इच्छुक लोग समय पर आवेदन करते हैं और इन योजनाओं का लाभ उठाते हैं, तो यह नीति उनके लिए आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन सकती है।