मध्यप्रदेश में रेल क्रांति दो साल में 5,200 किमी नेटवर्क, देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे राज्य बना !

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मध्यप्रदेश में बीते दो वर्षों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार देखने को मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश आज ‘डबल इंजन सरकार’ का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। रेलवे ट्रैक की कुल लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का लगभग 7.6 प्रतिशत है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश अब देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क वाला राज्य बन गया है।

रेलवे बजट में भी ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2026-27 के लिए मध्यप्रदेश को 15,188 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। गौरतलब है कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच राज्य को औसतन मात्र 632 करोड़ रुपये ही मिलते थे। वर्तमान में प्रदेश में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जो आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगी।

राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके अलावा ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम जैसे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा चुका है, जबकि 74 अन्य स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए 3,163 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है।

वंदे भारत ट्रेनों ने भी प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस रूट पर संचालित ये ट्रेनें यात्रियों के लिए तेज और सुविधाजनक विकल्प बन चुकी हैं। वहीं भोपाल और इंदौर में मेट्रो सेवाओं की शुरुआत से शहरी परिवहन को नई गति मिली है।

बड़ी परियोजनाओं की बात करें तो जबलपुर-गोंदिया रेललाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा। करीब 5,200 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना के पूरा होने पर पर्यटन और व्यापार में वृद्धि होगी। वहीं इंदौर-मनमाड रेललाइन, जिसकी लागत 18,036 करोड़ रुपये है, राज्य को महाराष्ट्र के बड़े बाजारों से सीधे जोड़ेगी। इससे कृषि, उद्योग और व्यापार को नया विस्तार मिलेगा।

इसके अलावा भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन, इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन जैसी परियोजनाएं भी स्वीकृत हो चुकी हैं। इनसे विभिन्न जिलों के बीच संपर्क बेहतर होगा और माल परिवहन में तेजी आएगी।

नई परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 1,000 गांवों और 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। साथ ही रायसेन जिले में 1,800 करोड़ रुपये की लागत से बन रही रेल कोच फैक्ट्री से करीब 5,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में रेलवे का तेजी से हो रहा विस्तार न केवल यात्रा को आसान बना रहा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आने वाले वर्षों में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।

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