मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 से लौटकर शुक्रवार रात जबलपुर पहुंचे। अपने संबोधन में उन्होंने प्रदेश की तेज विकास दर, सबसे सस्ती बिजली और वैश्विक निवेशकों की रुचि पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने भोपाल और इंदौर के बाद जबलपुर को तीसरी मेट्रो सिटी बनाने का ऐलान किया।
सीएम यादव ने दावोस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब हम वहां गए थे, तो सभी वैश्विक प्रतिनिधि भारतीयों से मिलने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश के प्रतिनिधियों पर तंज कसते हुए कहा कि वे भारतीयों के पीछे लगे दिख रहे थे, जो उनकी दुर्दशा दर्शाता है।
मध्य प्रदेश की सबसे सस्ती बिजली (लगभग 4 रुपए प्रति यूनिट) और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ट्रांजिशन पर जोर ने फोरम में निवेशकों को आकर्षित किया। दावोस में सीएम यादव ने पर्यटन और निवेश पर सेशन को संबोधित किया और प्रदेश को हेरिटेज और डेवलपमेंट का संगम बताया।

जबलपुर को मेट्रो सिटी बनाने से रोजगार में बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री ने बताया कि जबलपुर को मेट्रो सिटी बनाने से लगभग 50 हजार नए रोजगार सृजित होंगे। योजना में IT हब और पर्यटन पर खास जोर रहेगा। उन्होंने उद्योगपतियों से चर्चा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश का माहौल बनाए रखने के लिए राज्य सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार में लगातार काम कर रही है।
दावोस में मध्य प्रदेश की छवि चमकी
सीएम ने कहा कि दावोस में पूरे समय उनकी व्यस्तता रही, लेकिन प्रदेश की खुशबू पूरे कार्यक्रम में महसूस हुई। उन्होंने कहा कि अब हर कोई भारत और विशेषकर मध्य प्रदेश से जुड़ना चाहता है।
मोहन यादव ने कहा, “2014 के पहले और अब का भारत बहुत अलग है। आज चीन, जापान, इंग्लैंड या जर्मनी, हर तरफ से भारत से जुड़ने की चाहत है। मध्य प्रदेश की तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था और सस्ती बिजली ने इसे निवेश के लिए आकर्षक बना दिया है।”

प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार
भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए सीएम यादव ने बताया कि भोपाल और इंदौर की तरह जबलपुर को भी मेट्रोपोलिटन शहर बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सड़कों और बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा रहा है, ताकि निवेशक और उद्योग आसानी से अपना व्यवसाय चला सकें।
दावोस फोरम में मध्य प्रदेश ने 3000 से अधिक वैश्विक नेताओं को आकर्षित किया और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 500 करोड़ रुपए के निवेश का मार्ग प्रशस्त किया।