मध्य प्रदेश में एक गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें पुलिस ने पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन से 18 यात्रियों को धर्मांतरण के लिए गिरफ्तार किया। ये सभी लोग धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से जालंधर (पंजाब) जा रहे थे, जहां उन्हें पैसे और अन्य प्रलोभन के बदले ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा गया था। यह पूरा मामला पुलिस की तत्परता और गुप्त जानकारी पर आधारित घेराबंदी के कारण सामने आया।
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए यात्रियों से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि उन्हें सेजनाथ सूर्यवंशी और विजय कुमार नामक व्यक्तियों ने ईसाई धर्म अपनाने के लिए ललचाया था। आरोपियों ने उन्हें यह वादा किया था कि यदि वे ईसाई धर्म अपनाएंगे, तो उन्हें एक-एक लाख रुपए मिलेंगे, उनके बच्चों को अच्छे क्रिश्चियन स्कूलों में पढ़ाया जाएगा और उन्हें विदेश में नौकरी मिलने का अवसर भी मिलेगा। इस लालच के कारण इन लोगों ने धर्म परिवर्तन के लिए यात्रा शुरू की थी।

धर्मांतरण के इस गिरोह के आरोपी, सेजनाथ और विजय, पहले भी इन लोगों से मिल चुके थे और उन्हें पंजाब के जालंधर शहर के चर्चों में ले जाने का प्रस्ताव दिया था। कुछ यात्रियों ने यह भी बताया कि इन्हें पहले फिरोजपुर के चर्च में भी भेजा गया था, जहां इनका धर्म परिवर्तन कराया गया था।
यह पूरी घटना तब सामने आई जब बजरंग दल के पदाधिकारियों ने भोपाल पुलिस को सूचना दी कि छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में गरीब और मजदूर वर्ग के लोग धर्मांतरण के लिए जालंधर जा रहे हैं। यह सूचना तुरंत पुलिस को दी गई, और उनके द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई। पुलिस को यह जानकारी मिली थी कि पातालकोट एक्सप्रेस में एस-1, एस-2, एस-3, एस-4, एस-5 कोच में कुछ यात्री सवार हैं, जिन्हें धर्मांतरण के लिए ले जाया जा रहा है।
पुलिस ने सबसे पहले विदिशा के गंजबासौदा स्टेशन पर ट्रेन को रोका और 11 यात्रियों को हिरासत में लिया, जिनमें सेजनाथ और विजय कुमार भी शामिल थे। इसके बाद, बीना स्टेशन पर पुलिस ने चार और यात्रियों को पकड़ा। इन यात्रियों से पूछताछ के बाद, पुलिस को यह जानकारी मिली कि अभी भी कुछ लोग ट्रेन में सवार हैं। इसके चलते ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को लगभग 30 मिनट तक रोककर सघन तलाशी ली गई और तीन और यात्रियों को गिरफ्तार किया गया।
ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए यात्री थे:
- रितेश प्रकाश (37 वर्ष) – मिशन चर्च कंपाउंड निवासी
- मना विश्वकर्मा (45 वर्ष) – नोनिया करवल परतला निवासी
- राकेश (41 वर्ष) – विजय नागवंशी, छिंदवाड़ा निवासी
इन सभी आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे सेजनाथ और विजय कुमार से मिले थे, जिन्होंने उन्हें धर्म परिवर्तन के फायदे बताए थे। उनके अनुसार, धर्मांतरण के बाद उन्हें पैसों का लालच दिया गया और विदेश में नौकरी मिलने का भी वादा किया गया। इसके बाद उन्होंने जालंधर स्थित चर्च में धर्म परिवर्तन के लिए यात्रा शुरू की थी।

ग्वालियर जीआरपी ने पकड़े गए तीन यात्रियों को गंजबासौदा जीआरपी के हवाले कर दिया है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि और कौन लोग इस धर्मांतरण के गिरोह में शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि यह केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि इससे पहले भी कुछ लोग इन चर्चों में ले जाए जा चुके थे।
यह मामला केवल एक धर्मांतरण की साजिश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित गिरोह द्वारा गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को ललचाकर उनका धर्म परिवर्तन कराने का एक उदाहरण है। इस प्रकार के प्रलोभन से न केवल लोगों के धार्मिक विश्वासों से छेड़छाड़ होती है, बल्कि यह उनके मानसिक और भावनात्मक शोषण का भी कारण बनता है।
धर्म परिवर्तन को लेकर समाज में हमेशा ही संवेदनशील मुद्दे उठते रहे हैं, और इस तरह के मामले समाज में तनाव और विवाद पैदा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है ताकि समाज में शांति और सामंजस्य बना रहे।

इस मामले में बजरंग दल के पदाधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उनकी सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और इन यात्रियों को धर्म परिवर्तन के जाल में फंसने से बचाया। यह उदाहरण है कि जब समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा ऐसी घटनाओं की जानकारी साझा की जाती है, तो पुलिस के लिए त्वरित कार्रवाई करना संभव होता है।
मध्य प्रदेश में पातालकोट एक्सप्रेस में धर्मांतरण के लिए जा रहे 18 यात्रियों की गिरफ्तारी ने यह साबित किया कि ऐसे गिरोह गरीब और मेहनतकश वर्ग के लोगों को ललचाकर उनका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की और इन लोगों को बचाया, लेकिन यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि धर्म परिवर्तन के नाम पर किस तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं। पुलिस इस मामले की पूरी जांच कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।