मनीषा केस: CBI जांच से न्याय की उम्मीद, पर रेणुका और सोनाली जैसे कई मामले अब भी अधर में;

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हरियाणा के भिवानी की 19 वर्षीय लेडी टीचर मनीषा की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने इसे आत्महत्या की थ्योरी से जोड़कर देखा, लेकिन परिजनों और गांव वालों का कहना है कि उनकी बेटी कभी ऐसा कदम नहीं उठा सकती। यही वजह है कि बढ़ते जनदबाव और “जस्टिस फॉर मनीषा” कैंपेन के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केस को CBI को सौंपने की घोषणा की।

20 अगस्त को दिल्ली एम्स में तीसरे पोस्टमॉर्टम के बाद अब केस औपचारिक रूप से CBI के हवाले किया जाएगा। परिजनों और प्रदेश के लोगों को उम्मीद है कि CBI मनीषा की मौत का सच सामने लाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह केस भी उन अनगिनत मामलों जैसा तो नहीं हो जाएगा, जो CBI के पास गए तो सही, लेकिन अब तक न्याय का इंतजार कर रहे हैं?


“जस्टिस फॉर मनीषा” – एक जनआंदोलन

  • 11 अगस्त 2024 को मनीषा गायब हुईं।
  • 13 अगस्त को उनका शव खेत में मिला।
  • 15 अगस्त से पूरे प्रदेश में कैंडल मार्च और सोशल मीडिया कैंपेन शुरू हुआ।
  • 20 अगस्त को केस CBI को सौंपने की घोषणा हुई।

गांव और प्रदेशभर में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। मनीषा के अंतिम संस्कार में पूरा गांव उमड़ा। छोटे भाई नितेश (13) ने उन्हें मुखाग्नि दी। शव देखकर पिता संजय फूट-फूटकर रो पड़े और उनकी तबीयत बिगड़ गई।


रेणुका शर्मा केस – 30 साल से न्याय अधर में

26 अगस्त 1995 को यमुनानगर की 11वीं की छात्रा रेणुका शर्मा स्कूल से लौटते वक्त लापता हो गईं। दो दिन बाद उनका शव सरकारी चीनी की बोरी में बंद जंगल से मिला। अपहरण, सामूहिक ज्यादती और हत्या का यह केस सीबीआई को सौंपा गया।

परंतु आज 30 साल बाद भी केस का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। रेणुका के माता-पिता न्याय का इंतजार करते-करते गुजर गए। बहन मल्लिका शर्मा अब भी संघर्ष कर रही हैं, लेकिन थक चुकी हैं।


सोनाली फोगाट केस – मौत का कारण अब भी रहस्य

22-23 अगस्त 2022 की रात, भाजपा नेता और इन्फ्लुएंसर सोनाली फोगाट की गोवा में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पहले इसे पार्टी के दौरान “अप्राकृतिक मृत्यु” कहा गया। लेकिन पोस्टमॉर्टम में ब्लंट फोर्स इंजरी सामने आई और हत्या का केस दर्ज हुआ।

सितंबर 2022 में केस CBI को सौंप दिया गया। नवंबर में सोनाली के सहयोगियों सुधीर सांगवान और सुखविंदर सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। मगर अब तक हत्या का असली मकसद स्पष्ट नहीं हुआ और आरोपी सशर्त जमानत पर बाहर हैं।


मेवात का गैंगरेप-डबल मर्डर – 4 को फांसी

24-25 अगस्त 2016 की रात मेवात में हथियारबंद बदमाशों ने घर में घुसकर मुस्लिम दंपती की हत्या कर दी और एक महिला व नाबालिग बेटी से गैंगरेप किया। केस CBI को सौंपा गया।

लंबी जांच के बाद पंचकूला की विशेष अदालत ने मई 2024 में 4 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई और 6 आरोपियों को बरी किया। अब हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई लंबित है।


रायन इंटरनेशनल स्कूल मर्डर – अभी भी ट्रायल में

8 सितंबर 2017 को गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल के बाथरूम में 7 साल के छात्र प्रद्युम्न ठाकुर की गला रेतकर हत्या कर दी गई। पहले बस कंडक्टर को आरोपी बनाया गया, लेकिन बाद में CBI जांच में 11वीं का छात्र असली आरोपी पाया गया।

2018 में चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन आज 7 साल बाद भी केस ट्रायल स्टेज में ही है।


सवाल – क्या मनीषा को मिलेगा इंसाफ?

हरियाणा के ये केस बताते हैं कि CBI जांच हमेशा इंसाफ की गारंटी नहीं होती। कई मामलों में आरोपी बच जाते हैं, तो कई में फैसले आने में दशकों लग जाते हैं।

रेणुका के परिवार वालों का कहना है – “हमने इंसाफ की उम्मीद छोड़ दी है, अब दुआ है कि मनीषा को न्याय जरूर मिले।”


निष्कर्ष

मनीषा की मौत ने एक बार फिर समाज, सरकार और सिस्टम को आईना दिखाया है। न्याय में देरी, गवाहों का टूटना और जांच एजेंसियों की सुस्ती लोगों के विश्वास को कमजोर करती है। अब देखना होगा कि क्या CBI इस बार तेज और निष्पक्ष जांच करके मनीषा के परिवार को न्याय दिला पाती है, या फिर यह केस भी अधूरे सच की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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