नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पेश किए गए तीन विवादित विधेयकों पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्र सरकार द्वारा गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को “तमाशा” बताते हुए साफ कह दिया है कि वह इस समिति में अपना कोई सदस्य नहीं भेजेगी।
ये तीनों विधेयक ऐसे नेताओं—प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों—को लेकर हैं, जो गिरफ्तारी के बाद भी अपने पद पर बने रहते हैं। नए प्रावधानों के मुताबिक, यदि गिरफ्तार नेता 30 दिनों में जमानत नहीं ले पाते हैं, तो उन्हें स्वतः पद छोड़ना होगा।

कौन-कौन से बिल हैं चर्चा में?
केंद्र सरकार ने मानसून सत्र में तीन अहम विधेयक पेश किए:
- केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025
- मौजूदा गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट, 1963 में संशोधन का प्रस्ताव।
- फिलहाल इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अगर किसी मुख्यमंत्री या मंत्री पर गंभीर आपराधिक आरोप लगें और वह जेल जाए, तो उसे पद से हटाया जा सके।
- संशोधन के बाद ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री/मंत्री को हटाने की प्रक्रिया तय होगी।
- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025
- संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव।
- प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री या मंत्री अगर गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर जेल जाते हैं, तो उन्हें 30 दिनों के भीतर जमानत न मिलने पर पद से हटाया जा सकेगा।
- कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे अपने पद पर वापस लौट सकते हैं।
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन का प्रस्ताव।
- गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री/मंत्री को 30 दिन के भीतर पद से हटाने का प्रावधान इसमें जोड़ा जाएगा।

संसद में क्यों हुआ था हंगामा?
लोकसभा में जब गृह मंत्री अमित शाह ने इन विधेयकों को पेश करने की कोशिश की, तो विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया। हंगामे के दौरान विधेयकों की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर फेंकी गईं।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रही है और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग करेगी।
TMC का रुख
TMC ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। पार्टी ने कहा:
- यह JPC सिर्फ एक “तमाशा” है।
- सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि उसे क्या करना है।
- ऐसे में समिति में शामिल होना सिर्फ औपचारिकता और समय की बर्बादी होगी।
पार्टी ने साफ कर दिया कि वह JPC में कोई सदस्य नहीं भेजेगी।
JPC का गठन और रिपोर्ट
- लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने तीनों विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव पारित किया।
- JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे।
- समिति अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में सौंपेगी।
कानूनी और राजनीतिक असर
इन विधेयकों के लागू होने पर देश के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को