मर्दानी 3’ की अम्मा: नफरत के पार इंसानियत की परछाईं, मल्लिका प्रसाद सिन्हा बोलीं—यह किरदार झकझोरने के लिए बना है !

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मुंबई।
फिल्म ‘मर्दानी 3’ में ‘अम्मा’ का किरदार दर्शकों के लिए सिर्फ एक विलेन नहीं, बल्कि एक ऐसा आईना बनकर सामने आया है, जो डराता भी है और सोचने पर भी मजबूर करता है। इस डार्क, लार्जर-दैन-लाइफ किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री मल्लिका प्रसाद सिन्हा ने अपनी सशक्त अदाकारी से साबित कर दिया है कि नकारात्मक किरदार भी गहरी संवेदनशीलता और इंसानियत के साथ रचे जा सकते हैं।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मल्लिका ने ‘अम्मा’ के निर्माण की प्रक्रिया, मानसिक तैयारी, रानी मुखर्जी के साथ काम करने के अनुभव और अपने अभिनय सफर पर खुलकर बात की।

‘अम्मा’ सिर्फ विलेन नहीं, एक कॉम्प्लेक्स सोच है

मल्लिका बताती हैं कि जब पहली बार स्क्रिप्ट उनके पास आई, तो उन्होंने सबसे पहले किरदार का ग्राफ देखा।
“मुझे ऐसे किरदार आकर्षित करते हैं जो पूरी तरह सही या गलत न हों, बल्कि राइट और रॉन्ग की सीमा पर खड़े हों। ‘अम्मा’ एक मेगा विलेन है, लेकिन उसके अपने विश्वास हैं, अपनी सोच है। यही चीज उसे दिलचस्प बनाती है।”

उनके मुताबिक, ऐसे किरदार को निभाना डरावना नहीं, बल्कि रोमांचक होता है, क्योंकि इसमें परतें होती हैं।

मल्लिका से ‘अम्मा’ बनने तक का सफर

इस किरदार में ढलना सिर्फ एक्टिंग तक सीमित नहीं था।
“यह पूरी तरह एक कोलैबोरेटिव प्रोसेस था। डायरेक्टर, कॉस्ट्यूम, हेयर और मेकअप टीम—सबने मिलकर इस किरदार को गढ़ा। ज्वेलरी से लेकर हाथ-पैर तक हर डिटेल पर काम हुआ। मेरा फोकस उसके बिहेवियर और ह्यूमैनिटी को लाने पर था।”

मल्लिका मानती हैं कि स्क्रीन पर जो कुछ दिखता है, वह पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है।

दर्शकों की नफरत भी एक कामयाबी

‘अम्मा’ को लेकर दर्शकों की तीखी प्रतिक्रिया मल्लिका के लिए एक तरह की तारीफ है।
“एक्टर के तौर पर हम किरदार से नफरत नहीं कर पाते, क्योंकि हमें उसकी इंसानियत दिख जाती है। लेकिन जब दर्शक किसी किरदार से नफरत करते हैं, तो समझ आता है कि काम असरदार हुआ है।”

डरावने सीन और किरदार से बाहर निकलने की प्रक्रिया

फिल्म के कुछ सीन इतने स्याह हैं कि दर्शक भी असहज हो जाते हैं। इस पर मल्लिका साफ कहती हैं,
“किरदार में डूब जाना खतरनाक हो सकता है। यह हमारा प्रोफेशन है—किरदार रचना भी एक क्राफ्ट है और उससे बाहर आना भी। दुनिया में वैसे ही बहुत दर्द है, असली तनाव वहीं से आता है।”

मर्दानी फ्रेंचाइजी के विलेन पर सवाल

जब उनसे पूछा गया कि मर्दानी फ्रेंचाइजी में उनका फेवरेट विलेन कौन है—पहले पार्ट का ताहिर या दूसरे का विशाल जेठवा—तो उन्होंने इसे ‘अनफेयर सवाल’ बताया।
“दोनों ही शानदार अभिनेता हैं। हर एक्टर अपने किरदार में अलग यूनिकनेस लाता है।”

रानी मुखर्जी के साथ अनुभव

रानी मुखर्जी के साथ काम करने को मल्लिका बेहद खास मानती हैं।
“हमारे आमने-सामने के सीन कम थे, इसलिए ऑन-स्क्रीन रिएक्शन मेरे लिए भी सरप्राइज थे। शूट की शुरुआत में रानी जी ने मुस्कुराकर कहा—‘एवरीबडी लव्स यू ऑलरेडी।’ उन्होंने यह भी कहा कि हमारी आंखों का रंग एक जैसा है। वह पल मेरे लिए बहुत यादगार है।”

टाइपकास्ट होने का डर?

मल्लिका को इस बात का कोई डर नहीं कि ‘अम्मा’ जैसा किरदार उन्हें टाइपकास्ट कर देगा।
“एक्टर के पास हमेशा चॉइस होती है। मैंने अलग-अलग भाषाओं और तरह के किरदार किए हैं। हां, यह खुशी जरूर है कि इस रोल को इतना ऑर्गेनिक एक्सेप्टेंस मिला।”

अब तक का सफर और आगे के सपने

अपने सफर को मल्लिका एक शब्द में समेटती हैं—“मजा आया।”
वह बताती हैं कि परिवार का सपोर्ट उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। आगे के सपनों पर कहती हैं,
“सपने तो रोज देखती हूं। हर कलाकार क्रिएटिव ग्रोथ, चैलेंज और सम्मानजनक माहौल चाहता है।”

सिनेमा में बदलाव की जरूरत

मल्लिका मानती हैं कि अब यह सवाल पूछना बंद होना चाहिए कि “औरतें कहां हैं?”
“हम हर जगह हैं। नए और युवा स्टोरीटेलर्स को सपोर्ट करना जरूरी है, भले उनकी कहानियां अनकम्फर्टेबल हों। रिस्क से ही सिनेमा आगे बढ़ता है।”

दर्शकों के नाम संदेश

अंत में मल्लिका कहती हैं,
“‘मर्दानी 3’ सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं है। यह आत्ममंथन की फिल्म है। यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज के तौर पर हम कहां चूके हैं। फिल्म भारी जरूर है, लेकिन आपको मजा भी आएगा और सवाल भी उठेंगे।”

कुल मिलाकर, ‘अम्मा’ के जरिए मल्लिका प्रसाद सिन्हा ने यह साबित किया है कि एक दमदार विलेन भी सिनेमा में गहरे सामाजिक सवाल उठा सकता है—और शायद यही ‘मर्दानी 3’ की सबसे बड़ी ताकत है।

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