सागर। कहा जाता है कि मां में ही ईश्वर का वास होता है। मां की ममता के आगे तो स्वयं ईश्वर भी बाल रूप धारण कर लीलाएं करने को विवश हो जाते हैं। जन्म देने वाली मां और पालन-पोषण करने वाली मां—दोनों का स्थान जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन शास्त्रों में पालन करने वाली मां को भी उतना ही ऊंचा दर्जा दिया गया है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी माता के यहां जन्म लिया, लेकिन उनका पालन-पोषण माता यशोदा ने किया और आज भी संसार उन्हें यशोदा नंदन के रूप में पूजता है।
इसी भावनात्मक पृष्ठभूमि में मकरोनिया क्षेत्र के चर्चित समाजसेवी और भावुक हृदय वाले मनी सिंह गुरौन ने अपनी दिवंगत छोटी मां स्वर्गीय सतवंत कौर गुरौन की छठवीं पुण्य तिथि पर मानव सेवा का बड़ा निर्णय लिया है। आगामी 14 जनवरी, मकर संक्रांति के पावन अवसर पर मनी सिंह ने अपनी मां की स्मृति में जरूरतमंदों की सेवा को ही सच्ची श्रद्धांजलि मानते हुए यह संकल्प लिया है।
सतनाम नर्सिंग होम में पूर्णतः निशुल्क इलाज
मनी सिंह गुरौन ने बताया कि 14 जनवरी को उनकी मां की छठवीं पुण्य तिथि के अवसर पर सतनाम नर्सिंग होम में आने वाले सभी मरीजों का पूरी तरह निशुल्क इलाज किया जाएगा। इस दिन मरीजों से न तो इलाज शुल्क लिया जाएगा और न ही दवाइयों का कोई पैसा लिया जाएगा। उद्देश्य केवल इतना है कि मां की याद में अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को राहत पहुंचाई जा सके।

मकर संक्रांति पर कंबल और प्रसाद वितरण
ठंड के मौसम को देखते हुए मनी सिंह ने जरूरतमंदों को राहत देने के लिए कंबल वितरण का भी निर्णय लिया है। 14 जनवरी को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक अस्पताल परिसर में कंबल वितरित किए जाएंगे। इसके साथ ही मकर संक्रांति के अवसर पर खीर, तिल के लड्डू और भोग प्रसाद भी मरीजों और उनके परिजनों को वितरित किया जाएगा।
मां के प्रति स्नेह का भावुक उदाहरण
यह पहली बार नहीं है जब मनी सिंह गुरौन का मां के प्रति स्नेह और समर्पण सामने आया हो। कुछ माह पूर्व उनकी मां डॉ. त्रिपत कौर का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ गया था और उन्हें चंडीगढ़ में भर्ती कराना पड़ा था। उस समय उनकी हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन बेटे की प्रार्थनाओं, सेवा भाव और ईश्वर की कृपा से मां पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। आज वे पुनः मरीजों की सेवा में जुटी हुई हैं।
तीन माताओं का मिला आशीर्वाद
मनी सिंह गुरौन के जीवन की कहानी भी अपने आप में प्रेरणादायक है। उन्हें जीवन में एक नहीं बल्कि तीन माताओं का स्नेह प्राप्त हुआ—एक ने जन्म दिया, दूसरी ने पाला और तीसरी (चाची) ने पुत्र से भी बढ़कर प्रेम दिया। वे इसे अपना सौभाग्य मानते हैं और कहते हैं कि मां का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, केवल सेवा के माध्यम से उसका अंश मात्र ही लौटाया जा सकता है।
समाज के लिए प्रेरणा
मां की पुण्य तिथि पर सेवा, इलाज और दान का यह निर्णय न केवल एक बेटे की श्रद्धांजलि है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणादायक संदेश है कि शोक को शक्ति और सेवा में बदला जा सकता है। मनी सिंह गुरौन का यह कदम बताता है कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जिससे किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान आ सके।