सागर, 20 अगस्त 2025।
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा चलाए जा रहे “घर-घर गणेश, हर घर गणेश – विराजे माटी के गणेश” अभियान के अंतर्गत बुधवार को विकासखंड मालथौन में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण आचार्य श्री विद्यासागर ज्ञानपीठ विद्यालय मालथौन में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों, समाजसेवियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ एवं स्वागत
प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ परिषद के संभाग समन्वयक श्री दिनेश कुमार उमरैया एवं जिला समन्वयक श्री के.के. मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में एबीएस शिक्षा एवं समाजोत्थान समिति के प्रबंधक श्री आनंद जैन ने पगड़ी और गमछा पहनाकर अतिथियों का सम्मान किया। इसके पश्चात् ब्लॉक समन्वयक धर्म नाड़ीवाल ने अभियान की रूपरेखा और उद्देश्यों की विस्तार से जानकारी दी।
मिट्टी के गणेश बनाने का प्रशिक्षण
खुरई से आए शिल्पकार राघवेंद्र प्रजापति ने उपस्थित प्रतिभागियों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने की विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार से बिना रासायनिक रंग और प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग किए पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण हितैषी गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा सकती हैं। प्रतिभागियों ने स्वयं मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाकर इस प्रक्रिया का अनुभव भी किया।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष संदेश
इस अवसर पर संभाग समन्वयक श्री उमरैया ने कहा कि मिट्टी के गणेश का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की प्रतिमाओं से नदियों और तालाबों में प्रदूषण नहीं फैलता, साथ ही यह परंपरा हमारी सनातनी संस्कृति का हिस्सा रही है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे इस प्रशिक्षण का लाभ केवल स्वयं तक सीमित न रखें बल्कि अपने पड़ोसियों, विद्यार्थियों, नवांकुर सखियों और ग्रामवासियों तक भी पहुंचाएं।
उन्होंने आगे बताया कि इस पहल के तहत मिट्टी की प्रतिमाओं में बीज भी रोपे जाएंगे। जब प्रतिमा का विसर्जन घर या आंगन में किया जाएगा तो यह बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप लेंगे। इन पौधों को घर, खेत, आंगन या अन्य सुरक्षित स्थानों पर परिवार के बुजुर्गों के नाम या बच्चों के जन्मदिन पर लगाया जा सकता है। इस प्रकार गणेश उत्सव न केवल धार्मिक आस्था बल्कि हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का पर्व भी बन जाएगा।

प्रतिभागियों का संकल्प
प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने घर में ही गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करने का संकल्प लिया, ताकि जलस्रोत प्रदूषित न हों और पर्यावरण को कोई हानि न पहुंचे।
व्यापक सहभागिता
प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में समाजसेवी, विद्यार्थी और समितियों के सदस्य उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से कुलदीप सेन, रामजी ठाकुर, धीरज जैन, सजल जैन, मनोज अहिरवार, धीरेंद्र सिसोदिया, प्रस्फुटन समिति के सदस्य, सीएमसीएलडीपी टीम और विद्यालय की छात्र-छात्राएं शामिल थीं। सभी ने मिट्टी के गणेश बनाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।

निष्कर्ष
माटी गणेश सिद्ध गणेश अभियान न केवल धार्मिक आस्था को जीवित रखने का प्रयास है बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संतुलन और हरियाली की सौगात देने वाला जनआंदोलन भी है। मालथौन में संपन्न हुआ यह प्रशिक्षण इस दिशा में एक प्रेरणादायी कदम साबित हुआ।