मुंबई। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गुरु और पद्म विभूषण से सम्मानित उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान की स्मृति में शनिवार को मुंबई के बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड गार्डन में भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम ‘हाजरी 2026’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन उस्ताद साहब की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर हुआ, जिसमें पहली बार उनके शिष्य और देश के जाने-माने गायक एक ही मंच पर नजर आए।
इस विशेष संगीतमय शाम में ए.आर. रहमान, हरिहरन, सोनू निगम और शान जैसे दिग्गज कलाकारों ने सुपरस्टार सिंगर्स की तरह नहीं, बल्कि एक विनम्र शिष्य के रूप में अपने गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे कार्यक्रम में संगीत के साथ भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

परिवार की पहल, शिष्यों की हाजरी
इस कार्यक्रम का आयोजन उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के बेटे रब्बानी मुस्तफा खान और बहू नम्रता गुप्ता खान द्वारा किया गया। मंच पर गुरु–शिष्य परंपरा की गहराई साफ झलक रही थी। हर कलाकार ने अपने-अपने अंदाज में उस्ताद साहब के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।
ए.आर. रहमान ने सूफियाना अंदाज में की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत संगीतकार और गायक ए.आर. रहमान ने की। उन्होंने सूफी रंग में रंगे गीतों से माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
रहमान ने कुन फाया कुन, ख्वाजा मेरे ख्वाजा और अरजियां जैसे गीत प्रस्तुत किए। इसके बाद उन्होंने मुस्तफा परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर आओ बलमा और पिया हाजी अली की प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।

शान, हरिहरन और सोनू निगम की यादगार प्रस्तुतियां
- शान ने मैं हूं डॉन, चांद सिफारिश और ओम शांति ओम जैसे लोकप्रिय गीत गाए। इसके साथ ही उन्होंने उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान की प्रसिद्ध गजल चले आओ भी सुनाई, जिसे सुनकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
- हरिहरन ने अपनी मधुर आवाज में तू ही रे, रोजा, बाहों के दरमियां और यादें जैसे सदाबहार गीत पेश किए। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय प्रशिक्षण की झलक साफ नजर आई।
- कार्यक्रम का समापन सोनू निगम ने किया। उन्होंने परदेसिया, कल हो ना हो, अभी मुझ में कहीं और संदेशे आते हैं जैसे गीतों से श्रोताओं को भावुक कर दिया। सोनू निगम ने मंच से अपने गुरु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज जो भी हैं, उस्ताद साहब की बदौलत हैं।
कौन थे उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान
उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक और प्रतिष्ठित संगीत गुरु थे। वे रामपुर–सहसवान घराने से ताल्लुक रखते थे।
उनका जन्म 3 मार्च 1931 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। अपनी असाधारण गायकी और तानों की वजह से उन्हें ‘जूनियर तानसेन’ की उपाधि दी गई।
संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें—
- पद्म श्री (1991)
- पद्म भूषण (2006)
- पद्म विभूषण (2018)
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2003)
शामिल हैं।

संगीत जगत को दिए अनमोल शिष्य
उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान ने न सिर्फ शास्त्रीय संगीत को समृद्ध किया, बल्कि बॉलीवुड और आधुनिक संगीत जगत को भी कई अनमोल कलाकार दिए। उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले, ए.आर. रहमान, सोनू निगम, हरिहरन और शान जैसे दिग्गज कलाकारों को प्रशिक्षण दिया।
उनका निधन 17 जनवरी 2021 को मुंबई में हुआ था, लेकिन उनकी संगीत विरासत आज भी उनके शिष्यों और प्रशंसकों के जरिए जीवित है।
संगीत, श्रद्धा और विरासत का संगम
‘हाजरी 2026’ सिर्फ एक कॉन्सर्ट नहीं, बल्कि गुरु–शिष्य परंपरा, संगीत और श्रद्धा का उत्सव था। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी कला और सिखाई हुई साधना आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।