मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम : “आपका राशन – आपका अधिकार” !

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सागर, 03 अक्टूबर 2025।

गरीब और आमजन तक राशन वितरण की पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में “मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम – आपका राशन, आपका अधिकार” का क्रियान्वयन प्रारंभ किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आने वाले सभी पात्र हितग्राही अपने राशन के अधिकार और उसकी पारदर्शी उपलब्धता के प्रति जागरूक हों।


5.28 करोड़ हितग्राहियों तक लाभ

मंत्री राजपूत ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 5.28 करोड़ हितग्राही सम्मिलित हैं। इन्हें मासिक रूप से उनकी पात्रता के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है –

  • अंत्योदय परिवार : 35 किलो खाद्यान्न निःशुल्क + 1 किलो नमक (1 रुपये/किलो) + 1 किलो शक्कर (20 रुपये/किलो)।
  • प्राथमिकता श्रेणी परिवार : प्रति सदस्य 5 किलो खाद्यान्न निःशुल्क + 1 किलो नमक (1 रुपये/किलो)।

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि गरीब और कमजोर तबके के परिवार भूख और कुपोषण से सुरक्षित रह सकें।


कैसे हो रहा है क्रियान्वयन?

कार्यक्रम को तकनीक और पारदर्शिता से जोड़ा गया है :

  1. मोबाइल नंबर पंजीयन
    • 130 लाख परिवारों के एक सदस्य का मोबाइल नंबर डाटाबेस में दर्ज है।
    • जैसे ही राशन दुकानों पर खाद्यान्न पहुंचेगा या वितरण होगा, सिस्टम जनरेटेड संदेश सीधे उपभोक्ता के मोबाइल पर जाएगा।
  2. खाद्यान्न का डिस्पैच और ट्रैकिंग
    • जिलेवार विकासखंड स्तर पर बने 308 प्रदाय केंद्रों से राशन को उचित मूल्य दुकानों तक भेजा जाता है।
    • इसके लिए मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के अंतर्गत 100 वाहन नियोजित किए गए हैं।
    • वाहन से सामग्री निकलते ही पंजीकृत हितग्राही को SMS द्वारा सूचना मिल जाती है।
  3. उचित मूल्य दुकानों पर पारदर्शिता
    • दुकान पर राशन पहुंचने के बाद विक्रेता POS मशीन में प्रविष्टि करता है।
    • जैसे ही प्रविष्टि होती है, हितग्राही को संदेश मिलता है कि राशन दुकान पर उपलब्ध है।
    • वितरण के समय बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है, ताकि सही व्यक्ति को ही सामग्री मिले।
    • उपभोक्ता को प्राप्त राशन की सटीक मात्रा का विवरण भी मोबाइल संदेश के रूप में भेजा जाता है।

जागरूकता और जनभागीदारी

  • वर्ष में दो बार (26 जनवरी और 2 अक्टूबर) ग्राम सभाओं में राशन वितरण का पूरा ब्योरा पढ़ा जाएगा।
  • समय-समय पर उपभोक्ता जागरूकता शिविरों का आयोजन होगा, ताकि लोग अपने अधिकारों को समझें और निगरानी कर सकें।
  • पात्र परिवारों की सूची ग्रामसभा में वाचन कराई जाएगी, जिससे मृत या स्थाई रूप से प्रवास कर चुके लोगों को हटाकर प्रतीक्षारत पात्र परिवारों को जोड़ा जा सके।

निगरानी व्यवस्था

योजना को मजबूत बनाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर निगरानी की जिम्मेदारी तय की गई है –

  • ग्राम पंचायत/नगरीय निकाय स्तर : ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय और उचित मूल्य दुकान विक्रेता।
  • जनपद स्तर : एसडीएम, सहायक आपूर्ति अधिकारी और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी।
  • जिला स्तर : कलेक्टर और जिला आपूर्ति नियंत्रक/जिला आपूर्ति अधिकारी।
  • राज्य स्तर : संचालनालय खाद्य के कंट्रोल रूम से नियमित मॉनीटरिंग।

उपभोक्ताओं की भूमिका और लाभ

  • उपभोक्ता यह देख सकेंगे कि राशन सामग्री कब और कैसे प्रदाय केंद्र से उचित मूल्य दुकान तक पहुंची
  • SMS अलर्ट के जरिए हितग्राही समय पर जाकर राशन ले सकेंगे और कम मात्रा मिलने की स्थिति में तुरंत शिकायत कर पाएंगे।
  • इस व्यवस्था से परिवहन के दौरान हेराफेरी और दुकानों पर गड़बड़ी की संभावनाएं न्यूनतम होंगी
  • पारदर्शिता और जनभागीदारी से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी पात्र परिवार को उसका अधिकार वंचित न हो।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवददाता – अर्पित सेन
7806077338, 9109619237

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