पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में गो-संरक्षण और गो-संवर्धन के लिए निरंतर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में पहली बार निराश्रित गो-वंश के समुचित पालन-पोषण एवं गो-शालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “स्वावलंबी गो-शाला नीति” लागू की गई है, जिसका पूरे प्रदेश में सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है।
राज्यमंत्री श्री पटेल रविवार को शाहगढ़ स्थित आचार्य दयोदय गौ-शाला में टीन शेड लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गो-पालन में समुदाय की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है और जनसहयोग से संचालित गो-शालाएँ ही भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वावलंबी गो-शालाओं (गोकुल धाम) की स्थापना नीति-2025 लागू की गई है, जिसके अंतर्गत न्यूनतम 5 हजार गो-वंश के प्रबंधन हेतु राज्य सरकार द्वारा गो-शालाओं को 130 एकड़ तक भूमि उपयोग के लिए दिए जाने का प्रावधान है। इसमें से 5 एकड़ भूमि व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निर्धारित होगी, जिससे गो-शालाएँ आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।
राज्यमंत्री ने कहा कि जिले में स्वावलंबी गो-शालाओं के विकास हेतु प्रदेश स्तर से 20 गो-शालाओं की स्वीकृति दी गई है, जिनमें सागर जिला भी शामिल है। आने वाले समय में प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्वावलंबी गो-शाला स्थापित की जाएगी।

श्री पटेल ने शाहगढ़ में जनसहयोग से संचालित गौ-शाला के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि तीन वर्षों में गो-शाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन प्रमुख सूत्र अपनाने होंगे। उन्होंने कहा कि नंदी गो-वंश, स्वस्थ गायें, बीमार गायें एवं बछड़ों के लिए अलग-अलग शेड की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही सेक्स-सॉर्टेड सीमन तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान कराकर उत्तम नस्ल की गायें तैयार की जाएं।
उन्होंने कहा कि गो-शालाओं में पौधारोपण कर नर्सरी विकसित की जाए, जिन पौधों को सरकार खरीदेगी। जैविक खाद, गोबर गैस एवं सीएनजी निर्माण को बढ़ावा दिया जाए, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मांग बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि भविष्य में नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान देते हुए देशी नस्लों के साथ-साथ जर्सी जैसी उच्च दुग्ध उत्पादक नस्लों को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। गिर गाय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह नस्ल ब्राजील और गुजरात में बड़े पैमाने पर पाली जा रही है, जहां यह 60 लीटर तक दूध देती है।

राज्यमंत्री ने गौ-शाला में निर्माणाधीन मानस्तंभ, भूसा भंडारण स्थल तथा गो-वंश के पोषण हेतु किए गए प्रबंधों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि गोबर गैस, सीएनजी प्लांट, सोलर प्लांट और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाए। भविष्य में बछिया (हीफर) रोजगार का एक प्रभावी साधन बन सकती है।
कार्यक्रम में विधायक श्री वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि शाहगढ़ की गौ-शाला का संचालन सराहनीय है। उन्होंने पशु चिकित्सालय की भूमि पर बाउंड्री वॉल, कर्मचारियों के लिए क्वार्टर, एंबुलेंस सुविधा एवं पानी की टंकी की मांग मंत्री के समक्ष रखी।
लोकार्पण से पूर्व जनपद अध्यक्ष श्री मनीष यादव, जिला महामंत्री श्री राजेंद्र तिवारी, श्री अभय जैन हीरापुर, संभागीय अध्यक्ष मंडल अध्यक्ष श्री काशीराम यादव, श्रीमती राधा बाबूलाल खटीक सहित अन्य वक्ताओं ने मंच से गौ-शाला का परिचय देते हुए सीसी रोड, एंबुलेंस, प्रकाश व्यवस्था सहित विभिन्न आवश्यकताओं से अवगत कराया।
गौ-शाला दयोदय भोपाल के अध्यक्ष श्री प्रेमचंद प्रेमी एवं महामंत्री श्री राकेश लाला ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन श्री बीरेंद्र संधेलिया ने किया तथा आभार प्रदर्शन गौ-शाला समिति द्वारा किया गया।
इस अवसर पर गो-शाला समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, महिला-पुरुष एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।