मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार, 25 मार्च 2026 को प्रदेश के उभरते वन्य पर्यटन केंद्र वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का दौरा कर लगभग 10 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी का आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह दौरा न केवल पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। सफारी के दौरान उन्होंने रिजर्व क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों की गतिविधियों और जैव विविधता का अवलोकन किया। घने जंगल, विस्तृत घास के मैदान और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बामनेर नदी में कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। यह पहल जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें सहभागी बनना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस क्षेत्र को एक प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की विविधता और शांत वातावरण का अनूठा अनुभव मिलेगा।
डॉ. यादव ने अपने संबोधन में प्रदेश के अन्य प्रमुख वन्यजीव स्थलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को भी चीतों के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र चीतों का तीसरा सुरक्षित घर बनेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस टाइगर रिजर्व का भू-दृश्य दक्षिण अफ्रीका के घास के मैदानों के समान है, जो चीतों के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। विस्तृत खुले क्षेत्र, शिकार की पर्याप्त उपलब्धता और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र इसे चीतों के पुनर्वास के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि चीतों के आगमन से न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आएगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
डॉ. मोहन यादव ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करें, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। उन्होंने सड़क, आवास, गाइड सेवा और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में पहचान मिली है और अब इसे ‘चीता स्टेट’ के रूप में भी विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और वन्यजीवों की विविधता इसे देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल बना सकती है।

इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को रिजर्व क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, वन्यजीवों की संख्या और संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, हिरण, नीलगाय सहित कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं।
मुख्यमंत्री ने स्थानीय समुदाय की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि वन संरक्षण में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय लोग वन्यजीवों और पर्यावरण के महत्व को समझेंगे, तभी संरक्षण के प्रयास सफल हो पाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से स्थानीय युवाओं को गाइड, होम-स्टे संचालक और अन्य पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह दौरा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के लिए एक नई पहचान और संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है। उनके इस कदम से स्पष्ट है कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक धरोहर और सांस्कृतिक समृद्धि से है, और इन दोनों को सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहें और वन्यजीवों की सुरक्षा में अपना योगदान दें।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को क्षेत्र के विकास और पर्यटन को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन सकता है।