मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने 61वें जन्मदिवस के अवसर पर बुंदेलखंड और प्रदेशवासियों को एक ऐतिहासिक सौगात देते हुए वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। उन्होंने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के पुनर्वास हेतु “सॉफ्ट रिलीज बोमा” का विधि-विधान से भूमिपूजन किया। यह पहल न केवल प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण अभियान को नई दिशा देगी, बल्कि बुंदेलखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी स्थापित करेगी।

चीतों के लिए बुंदेलखंड बनेगा नया घर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना की सफलता के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के नए बसेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां का भू-परिदृश्य, घास के विस्तृत मैदान और प्राकृतिक वातावरण चीतों के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।

“बुंदेलखंड में गूंजेगी चीतों की दहाड़” — यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी योजना का हिस्सा है, जो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की पहचान बदल सकती है।
क्या है ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ तकनीक
चीतों को नए वातावरण में ढालने के लिए “सॉफ्ट रिलीज बोमा” तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में चीतों को पहले एक बड़े सुरक्षित बाड़े (बोमा) में रखा जाता है, जहां उन्हें निगरानी में रखा जाता है। धीरे-धीरे उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाता है, ताकि वे नए पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित कर सकें।

यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव पुनर्वास में अत्यंत सफल मानी जाती है और इससे चीतों के जीवित रहने और अनुकूलन की संभावना बढ़ जाती है।
वन्यजीव संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल थलचर ही नहीं, बल्कि नभचर और जलचर जीवों के संरक्षण के लिए भी मिशन मोड पर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा, “जंगल की असली खूबसूरती वहां के जीव-जंतुओं से होती है। यदि हम उन्हें सुरक्षित नहीं रखेंगे, तो हमारी प्राकृतिक विरासत भी खतरे में पड़ जाएगी।”
कछुओं का विमुक्तिकरण: जल संरक्षण का संदेश
अपने जन्मदिन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली बामनेर नदी में 14 कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा।

इनमें 6 कछुए “टेरा प्रिंस” प्रजाति के और 8 “सुंदरी” प्रजाति के थे। विशेषज्ञों के अनुसार, ये कछुए जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने और जलीय जैव विविधता को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि “प्रकृति और वन्यजीवों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।”
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व: जैव विविधता का खजाना
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यह सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में विस्तारित है।

इस रिजर्व को “लैंड ऑफ वुल्व्स” यानी भेड़ियों की धरती भी कहा जाता है। वर्तमान में यहां लगभग 32 बाघों के साथ-साथ पैंथर, भेड़िया, भालू, सियार, लकड़बग्घा, लोमड़ी, नीलगाय, चिंकारा, चौसिंगा, काला हिरण, मगरमच्छ और अनेक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।
यहां 240 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां भी मौजूद हैं, जो इसे पक्षी प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाती हैं।
पर्यटन और रोजगार के नए अवसर
चीतों के पुनर्वास से बुंदेलखंड में इको-टूरिज्म को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

होटल, गाइड सेवा, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
रहली में मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत
मुख्यमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर रहली में उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने बच्चियों को अपने हाथों से काजू कतली खिलाई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री ने आठ बच्चियों को ड्राइविंग लाइसेंस प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए और कहा कि सरकार बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

किसान के खेत पर सादगीपूर्ण भोजन
सागर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने हरदास रैकवार के खेत पर पहुंचकर ग्रामीण परिवेश में खाट पर बैठकर भोजन किया। उन्होंने आम के पेड़ की छांव में बुंदेली व्यंजनों जैसे कढ़ी, बिर्रा रोटी, खीर और खीचला-पापड़ का स्वाद लिया।

इस दौरान उन्होंने किसान परिवार से संवाद करते हुए सरकारी योजनाओं के लाभ की जानकारी ली। किसान ने बताया कि उसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान कार्ड, किसान सम्मान निधि और लाड़ली बहना योजना जैसी कई योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण अवसर पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, पूर्व मंत्री एवं विधायक गोपाल भार्गव, बृज बिहारी पटेरिया, प्रदीप लारिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर संदीप जी आर, विकास शाहवाल, अनिल सुचारी, हिमानी खन्ना, सचिंद्रनाथ चौहान सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर
चीतों की पुनर्वसाहट और टाइगर रिजर्व के विकास से बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने की पूरी संभावना है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास का भी एक मजबूत आधार बनेगी।

यह पहल न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभरेगी, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपने जन्मदिन पर किए गए ये कार्य केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं थे, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा थे, जिसमें वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और सामाजिक समरसता जैसे अनेक पहलुओं को समाहित किया गया।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों का पुनर्वास, कछुओं का विमुक्तिकरण, बच्चियों को प्रोत्साहन और किसान के घर जाकर संवाद—ये सभी पहलें इस बात का संकेत हैं कि प्रदेश सरकार समग्र विकास की दिशा में कार्य कर रही है।
आने वाले समय में जब बुंदेलखंड के जंगलों में चीतों की दहाड़ गूंजेगी, तब यह पहल न केवल एक पर्यावरणीय उपलब्धि होगी, बल्कि यह उस दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक भी होगी, जिसने प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया।