‘मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना’ के विरोध में बस ऑपरेटर एकजुट !

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मध्यप्रदेश सरकार की प्रस्तावित ‘मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना’ लागू होने से पहले ही प्रदेशभर के निजी बस संचालकों ने इसका खुला विरोध शुरू कर दिया है। रविवार को सागर के कर्रापुर स्थित एक निजी होटल में प्रदेशस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में बस ऑपरेटर शामिल हुए।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगले एक-दो दिनों में सभी जिलों में कलेक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 2 मार्च से प्रदेश के सभी बस ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।


🚨 “सरकार बस मालिकों को किराएदार बनाना चाहती है”

बैठक में मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार सस्ती और बेहतर परिवहन सेवा देने की बात कर रही है, जबकि उसके पास खुद की बसें नहीं हैं। उनका कहना है कि योजना के तहत मौजूदा बस ऑपरेटरों के स्थायी परमिट निरस्त कर निजी कंपनियों को परमिट दिए जाएंगे।

ऑपरेटरों का दावा है कि प्रदेश में ऐसी सात कंपनियां पहले ही बनाई जा चुकी हैं। उनका आरोप है कि सरकार का उद्देश्य मौजूदा बस मालिकों को कमजोर कर उन्हें कंपनियों के अधीन किराएदार बनाना है, जिससे उनका आर्थिक शोषण होगा।


⚖️ “सरकारी बसें नहीं तो सेवा सरकारी कैसे?”

सम्मेलन में उपस्थित बस संचालकों ने सवाल उठाया कि जब सरकार की खुद की बसें नहीं होंगी और संचालन निजी कंपनियों के माध्यम से होगा, तो इसे सरकारी सेवा कैसे कहा जा सकता है?

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में ‘सूत्र सेवा’ बसों के नाम पर जनता का पैसा खर्च हो चुका है और अब फिर से निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से योजना लाई जा रही है।

बस ऑपरेटरों का कहना है कि उनके वर्षों पुराने स्थायी परमिट छीने जाने की आशंका है, जिससे हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।


📄 कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन

बस ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है कि वे प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे। यदि सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

बैठक में सभी यूनियनों ने प्रस्तावित हड़ताल का समर्थन किया।


📌 क्या है ‘मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना’?

सरकार अप्रैल 2026 से इस योजना को लागू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • लगभग दो दशक बाद परिवहन सेवा को सरकारी नियंत्रण में लाने की तैयारी।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच किफायती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना।
  • उन ग्रामीण रूटों पर विशेष ध्यान जहां बसों की कमी या खराब कनेक्टिविटी है।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालन।

योजना के तहत बसें निजी ऑपरेटरों की ही होंगी, लेकिन संचालन की निगरानी और नियंत्रण सरकार के पास रहेगा।


📱 ट्रैकिंग और ई-टिकटिंग के लिए बनेगा ऐप

सरकार बसों की ट्रैकिंग, ई-टिकटिंग और समय-सारिणी के पालन के लिए एक मोबाइल एप और डिजिटल डैशबोर्ड तैयार करेगी। इससे यात्रियों को बसों की रीयल-टाइम जानकारी मिल सकेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।


👥 सम्मेलन में रहे ये पदाधिकारी मौजूद

सम्मेलन में मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन, बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संतोष पांडेय, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील आर्य, जिला अध्यक्ष राजीव शर्मा, सिमरन चावला, रूपल आजमानी और सुरेश राउत सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के बस ऑपरेटर उपस्थित रहे।

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