मेडिकल कॉलेज नर्सिंग स्टाफ का नियमितीकरण को लेकर विरोध !

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दतिया। जिले के मेडिकल कॉलेज में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ ने 18 महीने से जारी परीविक्षा अवधि और नियमितीकरण को लेकर कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि नियमानुसार उनकी परीविक्षा अवधि समय पर पूरी कर नियमित नियुक्ति की जानी चाहिए थी, लेकिन कॉलेज प्रशासन द्वारा लगातार टालमटोल की जा रही है, जिससे वे मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि वे पिछले 18 महीनों से डीन कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनके नियमितीकरण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इस अनिश्चितता के कारण न सिर्फ उनकी नौकरी अस्थिर बनी हुई है, बल्कि भविष्य को लेकर भी वे लगातार तनाव में हैं।

स्टाफ का आरोप है कि डीन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और न ही यह स्पष्ट किया जा रहा है कि उनकी परीविक्षा अवधि कब पूरी मानी जाएगी। नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि बार-बार पूछने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिलते हैं, ठोस जवाब नहीं। इसी असमंजस की स्थिति ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।

नर्सिंग स्टाफ ने यह भी बताया कि कई कर्मचारियों पर बैंक लोन चल रहे हैं, वहीं कई कर्मचारी बाहर से आकर दतिया में रह रहे हैं, जिनका किराया और अन्य खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि वे 18 महीनों से 100 प्रतिशत वेतन के साथ नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन डीन उनकी बात सुनने को भी तैयार नहीं हैं।

स्टाफ के अनुसार उनकी नियुक्ति पूर्व डीन के कार्यकाल में हुई थी और उसी समय नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होनी थी। हालांकि नए डीन के पदभार संभालने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह से ठप पड़ गई। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित आवेदन और मौखिक रूप से अनुरोध किया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

नर्सिंग कर्मियों का आरोप है कि वर्तमान डीन यह कहकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं कि नियुक्ति पुराने डीन के समय हुई थी, इसलिए नियमितीकरण भी वही करेंगे। इसी रवैये से परेशान होकर स्टाफ ने अपनी समस्या को लेकर अब तक सीएम हेल्पलाइन पर 80 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं, ताकि उच्च स्तर पर उनकी आवाज सुनी जा सके।

नर्सिंग स्टाफ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उनकी नियमितीकरण की मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे कलेक्टर और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे और आगे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान कर उन्हें मानसिक और आर्थिक राहत दी जाए।

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