सागर, मकरोनिया।
मकरोनिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत रजाखेड़ी मार्ग पर स्थित एक वर्षों पुरानी मजार को बीते रविवार देर रात अचानक हटा दिए जाने के बाद मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। सोमवार सुबह जैसे ही मजार हटाए जाने की जानकारी समाज के लोगों को लगी, बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि यह मजार कई वर्षों पुरानी थी, जिसे नियमों को दरकिनार करते हुए रात के अंधेरे में अवैध रूप से हटाया गया। समाज के वरिष्ठ सदस्य अबरार उल हक ने बताया कि यह मजार क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र थी, जिसे देर रात लगभग 2 बजे कुछ अज्ञात लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर आए और बिना किसी आधिकारिक सूचना या प्रक्रिया के मजार को पूरी तरह तोड़ दिया। उनका कहना है कि यदि मजार को हटाने की कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती, तो समाज को कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन इस तरह चुपचाप रात में कार्रवाई से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
प्रशासन से न्याय की मांग
मौके पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मजार को तत्काल पुनर्निर्मित किया जाए और इस कृत्य में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन के दौरान यातायात प्रभावित हुआ, लेकिन स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया।

सीएसपी सिटी ललित कश्यप और सीएसपी मकरोनिया नीलम चौधरी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक संवाद किया। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई है, तो उस पर पुनः विचार किया जाएगा।
समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़?
अबरार उल हक सहित अन्य समाजजनों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक स्थल को हटाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे समुदाय की धार्मिक भावनाओं पर चोट पहुंची है। समाज के लोगों ने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन को मजार को हटाना था, तो पहले सूचना क्यों नहीं दी गई? रात के अंधेरे में इस तरह की कार्रवाई से यह प्रतीत होता है कि मजार को जानबूझकर निशाना बनाया गया।
पुलिस का रुख
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से सहयोग की अपील की और कहा कि समाज के प्रतिनिधियों से बात कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आगे की राह
मुस्लिम समाज ने स्पष्ट रूप से प्रशासन के सामने यह शर्त रखी है कि जब तक मजार का पुनर्निर्माण नहीं होता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, वे संतुष्ट नहीं होंगे। समाज के वरिष्ठजन प्रशासन से वार्ता की तैयारी में हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक करेंगे।

रजाखेड़ी मार्ग पर मजार हटाने की घटना से उपजा विवाद केवल धार्मिक भावना से जुड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर कैसे संतुलित कदम उठाता है ताकि शांति बनी रहे और न्याय भी सुनिश्चित हो सके।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
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