रहली। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रहली में शुक्रवार 6 मार्च को मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ और भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच, आत्मरक्षा और साइबर अपराध जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहली के एसडीओ पुलिस प्रकाश मिश्रा रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. मनोज जैन और डॉ. पवन कुमार शर्मा ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ और पुष्पमाला भेंट कर स्वागत किया।
छात्रों से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान एसडीओपी प्रकाश मिश्रा ने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए मनोबल, तनावमुक्त पढ़ाई और सकारात्मक चिंतन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में विद्यार्थियों के सामने कई प्रकार के मानसिक दबाव होते हैं, लेकिन सही सोच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक श्रम, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी समय निकालें, क्योंकि इससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और व्यक्ति अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
महिला दिवस के संदर्भ में आत्मरक्षा पर चर्चा
आगामी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एसडीओपी ने विशेष रूप से छात्राओं से आत्मरक्षा और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के समय में लड़कियों का आत्मनिर्भर और सजग होना बेहद आवश्यक है। आत्मरक्षा के छोटे-छोटे उपाय और सतर्कता कई बार बड़ी घटनाओं को टाल सकती है।
उन्होंने छात्राओं को यह भी बताया कि किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में घबराने के बजाय साहस और समझदारी से काम लेना चाहिए तथा तुरंत पुलिस या भरोसेमंद लोगों से संपर्क करना चाहिए।

साइबर क्राइम से सावधान रहने की दी सलाह
कार्यक्रम में साइबर अपराधों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। एसडीओपी मिश्रा ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए युवाओं को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम, मोबाइल या सोशल मीडिया से जुड़े पासवर्ड और ओटीपी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। साथ ही लालच में आकर किसी भी संदिग्ध लिंक या ऑफर पर क्लिक करने से बचें।
खेलकूद से बढ़ता है मनोबल
उन्होंने कहा कि खेलकूद केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए भी बेहद जरूरी है। खेलों में हार-जीत दोनों ही परिस्थितियां व्यक्ति को सीख देती हैं और जीवन की चुनौतियों से जूझने का साहस बढ़ाती हैं।
एसडीओपी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि परीक्षाओं या जीवन के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच से सफलता अवश्य मिलती है।
प्राचार्य ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य सुषमा चौरसिया ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास और जागरूकता के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं।
कार्यक्रम का संयोजन और आभार प्रदर्शन एनटीएफ मानसिक स्वास्थ्य एवं छात्र कल्याण प्रभारी नेहा डेहरिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन पीयूष जैन द्वारा किया गया।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर महाविद्यालय के कई प्राध्यापक और कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. राजू सेन, डॉ. संगीता जग्गी, डॉ. भूपेंद्र कुमार, डॉ. मैत्री मोहन, डॉ. हरिशचंद्र, राजमणि सोनी, डॉ. स्वपना सराफ, नेहा जैन, पूजा गुप्ता, आकांक्षा सिंघई, शीतल मिश्रा, मेघा श्रीवास्तव, शुभ्रा अवस्थी, आत्माराम दुबे सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अतिथि वक्ता से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से समाधान किया। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक साबित हुआ।