रहली | पिछले करीब ढाई माह से मक्का की भारी आवक से गुलजार चल रही कृषि उपज मंडी में मंगलवार को आवक में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मक्का के भाव लगभग स्थिर बने रहे, लेकिन धीरे-धीरे कम हो रही सोयाबीन की आवक मंगलवार को पूरी तरह से शून्य रही। इससे मंडी की रौनक पहले के मुकाबले फीकी नजर आई।
जानकारी के अनुसार जब मक्का के दानों में नमी करीब 20 प्रतिशत थी, उस समय मंडी में मक्का की अधिकांश बोली 1700 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर लग रही थी। अब मक्का की नमी घटकर करीब 12 प्रतिशत तक पहुंच गई है, इसके बावजूद भाव 1700 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे बने हुए हैं। नमी कम होने के बावजूद दामों में गिरावट से किसान काफी निराश हैं।

भाव बढ़ने की उम्मीद में कई किसानों ने पहले ही मक्का की बिक्री रोक दी थी, लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते कुछ किसानों को कम दामों पर ही उपज बेचनी पड़ी। अब एक बार फिर किसान बिक्री रोककर भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। मंगलवार को मंडी में करीब 12 हजार क्विंटल मक्का की आवक दर्ज की गई, जिसमें अधिकतम बोली 1725 रुपये प्रति क्विंटल रही।
वहीं सोयाबीन की बात करें तो मंगलवार को मंडी में इसकी बिल्कुल भी आवक नहीं हुई। सोयाबीन की आवक धीरे-धीरे घटने के बाद अब पूरी तरह से थम जाना किसानों की बदली रणनीति और बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है।
थ्रेसिंग के बाद बढ़ी किसानों की लागत
जो किसान भाव बढ़ने की आस में थ्रेसिंग के बाद मक्का का स्टॉक कर रहे हैं, उन्हें अब अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय तक भंडारण करने पर मक्का में घुन लगने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे बचाव के लिए किसानों को दवाओं का छिड़काव करना पड़ रहा है। इससे किसानों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है और लाभ की उम्मीद और कमजोर होती जा रही है।
कुल मिलाकर मंडी में मक्का के भाव स्थिर रहने और आवक घटने से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसान बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में फिलहाल बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।