राजगढ़: खिलचीपुर में गाडगंगा नदी पर बना बड़ा पुल जर्जर !

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लोहे के सरिए उखड़ने लगे, हादसे की आशंका

राजगढ़/खिलचीपुर। खिलचीपुर और सोमवारिया गांव को जोड़ने वाला गाडगंगा नदी पर स्थित बड़ा पुल जर्जर हालत में पहुंच चुका है। करोड़ों रुपए की लागत से करीब डेढ़ दशक पहले बनाए गए इस पुल की सड़क की परतें उखड़ चुकी हैं, जिससे पुल के बीचोंबीच गहरे गड्ढे बन गए हैं और उनमें से लोहे के सरिए तक बाहर निकल आए हैं। कई जगह ये सरिए टूट चुके हैं और पुल के ज्वाइंट्स पर लगी लोहे की प्लेटें भी अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगी हैं।

  

रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, ट्रक भी शामिल

यह पुल खिलचीपुर शहर को सोमवारिया गांव और अन्य ग्रामीण अंचलों से जोड़ता है। इस पुल से रोजाना हजारों की संख्या में दोपहिया, चारपहिया वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी ट्रक गुजरते हैं। लेकिन अब इसकी जर्जर हालत से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। बारिश के दिनों में खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

स्थानीय निवासी रमेश तंवर और सुरेंद्र सौंधिया ने बताया कि “हर दिन पुल की हालत और बिगड़ रही है। यदि जल्द इसकी मरम्मत नहीं कराई गई, तो बड़ा हादसा हो सकता है। हम जल्द ही प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पुल की तत्काल मरम्मत की मांग करेंगे।”

कभी वैकल्पिक मार्ग के लिए बना था पुल, अब बन गया खतरा

इससे पहले लोग गाडगंगा नदी पर बने पुराने छोटे पुल से आवागमन करते थे, लेकिन बरसात के दौरान नदी के उफान में आने से वह मार्ग बंद हो जाता था। इसी समस्या को देखते हुए वर्ष 2010-11 में सेतु निर्माण योजना के तहत इस बड़े पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन मात्र कुछ वर्षों में ही पुल की हालत खराब हो जाना निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।

प्रशासन ने कहा – जांच टीम भेजी जाएगी

इस विषय में जब खिलचीपुर एसडीएम अंकिता जैन से बात की गई, तो उन्होंने कहा, “हमें पुल की स्थिति की जानकारी मिली है। जांच के लिए जल्द ही एक तकनीकी टीम भेजी जाएगी। टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही मरम्मत या पुनर्निर्माण के संबंध में कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।”

ग्रामीणों की मांग – प्रशासन जल्द करे हस्तक्षेप

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि इस पुल को लेकर गंभीरता दिखाई जाए और तकनीकी जांच के बाद तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया जाए, ताकि हादसों से बचा जा सके और सोमवारिया सहित अन्य गांवों का संपर्क बरकरार रहे।


गाडगंगा नदी पर बना यह बड़ा पुल फिलहाल खतरे की घंटी बन चुका है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो बड़ी दुर्घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला न केवल क्षेत्रीय विकास का, बल्कि आमजन की सुरक्षा से जुड़ा है, जिसे प्राथमिकता देना आवश्यक है।

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