सागर के रुद्राक्ष धाम में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान पंडित प्रेमभूषण महाराज ने सनातन धर्म, तप, श्रद्धा और समर्पण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा वाचन करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल सनातन धर्म ही तप करने की सही और सार्थक प्रेरणा देता है। हमारे लगभग सभी सद्ग्रंथ इस बात की पुष्टि करते हैं कि बिना तप के किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति यह सिखाती है कि वास्तविक सुख तप और संयम में है, भोग में नहीं। मनुष्य की योनि तप करने और आत्मिक उन्नति के लिए प्राप्त होती है, जबकि अन्य सभी योनियों को भोग योनि कहा गया है। इसलिए मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुखों में लिप्त रहना नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और ईश्वर भक्ति होना चाहिए।
श्रद्धा में अर्पण और समर्पण आवश्यक

श्रीराम कथा के दौरान पंडित प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि यदि श्रद्धा में अर्पण और समर्पण हो, तो श्रद्धा अवश्य फल प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य को अपने कर्मों और विश्वास पर ही भरोसा नहीं होता, तो भगवान का साक्षात्कार कैसे संभव हो सकता है।
उन्होंने कहा—“खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा।” अर्थात जब मन से द्वेष, भ्रम और अस्थिरता समाप्त होती है, तभी ईश्वर की अनुभूति होती है।
महाराज ने श्रद्धालुओं को अपने इष्ट के प्रति केवट और शबरी जैसी अटूट निष्ठा रखने का संदेश दिया। साथ ही सुग्रीव का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान से मिलने के बाद भी यदि मनुष्य संसारिक मोह में उलझ जाए, तो वह भगवान को ही भूल जाता है।
मानव जीवन का उद्देश्य भजन और आत्मबोध

पंडित प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि जीव को मानव शरीर स्वयं की पहचान करने और भगवान का भजन करने के लिए प्राप्त हुआ है। जैसे-जैसे मनुष्य भगवान की भक्ति की ओर अग्रसर होता है, वैसे-वैसे संसार के भौतिक सुख स्वतः उससे दूर होते चले जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिक सुखों का वास्तविक महत्व मनुष्य को तब समझ आता है, जब उसका शरीर अक्षम और रुग्ण हो जाता है। इसलिए मनुष्य का कर्तव्य है कि वह अपनी बुद्धि और शक्ति को धर्म के मार्ग में लगाए तथा धर्म सम्मत जीवन व्यतीत करे।
भगवान राम के वचन उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा—
“निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा।”
अर्थात भगवान को कपट, छल, धोखा और दूसरों में दोष ढूंढने वाले लोग प्रिय नहीं होते।
कथा सबके भाग्य में नहीं होती
पंडित प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा सुनना भी हर किसी के भाग्य में नहीं होता। कथा मनुष्य के अपने-अपने पुण्य का परिणाम होती है। जो व्यक्ति विषय-विकारों से दूर रहकर भगवान की ओर बढ़ने का प्रयास करता है, वही पुण्य अर्जित कर पाता है।
उन्होंने कहा कि स्नेह समर्पण से प्राप्त होता है। जिसका जितना अधिक समर्पण होता है, भगवान भी उसे उतना ही स्नेह प्रदान करते हैं। जब स्वयं के समर्पण में कमी होती है, तो दूसरों से स्नेह की अपेक्षा करना उचित नहीं है।
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

सप्ताह भर चली श्रीराम कथा में सागर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे कथा काल में रुद्राक्ष धाम भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
ढाना हवाई पट्टी पर केंद्रीय मंत्री का स्वागत
श्रीराम कथा में शामिल होने के लिए शुक्रवार दोपहर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सागर पहुंचे। वे ढाना हवाई पट्टी पर उतरे, जहां सागर विधायक शैलेंद्र जैन, देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया सहित भाजपा के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया।
इसके पश्चात वे सड़क मार्ग से रुद्राक्ष धाम पहुंचे, जहां भगवान के दर्शन कर श्रीराम कथा में शामिल हुए और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।