सागर।
मध्यप्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें सत्र में कथा व्यास प्रेमभूषण महाराज ने ब्राह्मणों के सम्मान, राम के त्याग और भरत चरित्र की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों का अपमान करोड़ों कुलों के नाश का कारण बन सकता है। इतिहास में प्रतापी राजा प्रताप भानु इसका उदाहरण हैं। स्वयं भगवान राम ने वनवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि से ऐसा स्थान मांगा, जहां उनके निवास से किसी साधु, संत या तपस्वी को कष्ट न हो। मनुष्य रूप में आए भगवान राम ने ब्राह्मणों और संत समाज को जो सम्मान दिया, उसका पालन आज भी किया जाना चाहिए—इसी में समाज और जगत का कल्याण निहित है।
कथा के दौरान प्रेमभूषण महाराज ने भगवान राम की मंगल वन यात्रा, त्याग, मर्यादा और प्रेम के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम की कथा त्याग की कथा है। अयोध्या में राजा दशरथ के देहावसान के बाद केवल राजपरिवार ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जनमानस में त्याग का जो भाव दिखाई देता है, वह आज भी अनुकरणीय है। भरत चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “रामहि केवल प्रेम पियारा” — यही वह सूत्र है, जिससे भगवान का प्रेम प्राप्त होता है।

महाराज ने कहा कि भरत प्रेम की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं, जो सदैव राम की आज्ञा में रहते हैं। इसी कारण भगवान राम भरत पर सबसे अधिक विश्वास करते हैं। सामान्य जीवन में भी वही व्यक्ति धन्य है, जिसके पास कहने में रहने वाला कोई अपना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य जीवन में चाहे जितना भी संग्रह कर ले, साथ केवल पुण्य, परमार्थ और सत्कर्म ही जाते हैं। केवल प्रवचन से सिद्धि नहीं मिलती, बल्कि मन, कर्म और वचन से समर्पण करने पर ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
प्रेमभूषण महाराज ने कलियुग के संदर्भ में कहा कि आज राम के पक्षकार भी हैं और विरोधी भी, किंतु यह आश्चर्यजनक है कि अब रावण के समर्थक भी दिखाई देते हैं। स्वार्थवश राम का विरोध समझा जा सकता है, लेकिन रावण की पूजा विचारणीय है। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और हजारों श्रद्धालु भक्ति रस में झूमते नजर आए।

जनप्रतिनिधियों और संतों की गरिमामयी उपस्थिति
कथा श्रवण हेतु राज्य शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री, विधायकगण, पूर्व विधायक, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन के मुख्य यजमान विधायक भूपेंद्र सिंह ने सपरिवार व्यासपीठ पूजन किया एवं आरती उतारी। रामायण आरती और हनुमान चालीसा पाठ में पूरा कथा पंडाल सहभागी बना।
ऋषिकेश से पधारे त्रिदंडी स्वामी शक्ति प्रसाद सहित अनेक संतों की उपस्थिति रही। जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने आचार्य विद्यासागर महाराज का चित्र भेंट कर प्रेमभूषण महाराज का सम्मान किया।

दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रुद्राक्ष धाम परिसर स्थित नव-प्राण प्रतिष्ठित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। अनेक ग्रामों से श्रद्धालु ध्वज, शोभायात्रा और भजन मंडलियों के साथ मंदिर पहुंचे।

5 और 6 फरवरी को विशिष्ट अतिथियों का आगमन
श्रीराम कथा के छठे दिवस 5 फरवरी को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तथा सातवें और समापन दिवस 6 फरवरी को केंद्रीय कृषि मंत्री कथा में सहभागिता करेंगे। समापन दिवस पर विशाल भंडारा प्रसादी का आयोजन प्रातः 10 बजे से किया जाएगा।
व्यवस्थाओं में सहयोग करने वालों का योगदान सराहनीय
कथा आयोजन को सफल बनाने में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और ग्रामवासियों का उल्लेखनीय योगदान रहा। पार्किंग, सुरक्षा, अतिथि सत्कार एवं अन्य व्यवस्थाओं में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सेवाएं दीं।