रेहली विधायक गोपाल भार्गव ने तीर्थयात्रियों को माँ कामाख्या दर्शन हेतु ससम्मान विदा किया !

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पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं रेहली विधायक गोपाल भार्गव ने आज जनपद पंचायत रहली परिसर में मध्यप्रदेश शासन की तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत माँ कामाख्या देवी के दर्शन हेतु प्रस्थान कर रहे श्रद्धालुओं को ससम्मान विदा किया। इस अवसर पर विधायक गोपाल भार्गव ने तीर्थयात्रियों को पुष्पमालाएँ पहनाकर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उनकी सुरक्षित, सुखद एवं मंगलमय यात्रा की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन की तीर्थ दर्शन योजना समाज के वरिष्ठ नागरिकों एवं जरूरतमंद श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसके माध्यम से उन्हें देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि माँ कामाख्या देवी शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र हैं और उनके दर्शन से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

विधायक भार्गव ने तीर्थयात्रियों से संवाद करते हुए कहा कि तीर्थ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं होती, बल्कि यह मन, विचार और आत्मा को शुद्ध करने का माध्यम होती है। उन्होंने सभी यात्रियों से यात्रा के दौरान आपसी सहयोग, अनुशासन और संयम बनाए रखने की अपील की, ताकि यात्रा सुखद एवं सुरक्षित बनी रहे।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने तीर्थ दर्शन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि शासन द्वारा यात्रियों के लिए यात्रा, आवास, भोजन एवं चिकित्सा सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान यात्रियों की देखरेख के लिए प्रशिक्षित दल एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे श्रद्धालु बिना किसी चिंता के तीर्थ दर्शन कर सकें।

कार्यक्रम में जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाजसेवी तथा तीर्थयात्री बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर भक्ति एवं उल्लास का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने विधायक गोपाल भार्गव एवं शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से उन्हें माँ कामाख्या देवी के दर्शन का अवसर मिल रहा है, जो उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण है।

कार्यक्रम के अंत में सभी तीर्थयात्रियों को बसों द्वारा दर्शन हेतु रवाना किया गया। विदाई के समय जय माता दी के जयघोष से वातावरण गूंज उठा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को भी दर्शाता नजर आया।

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