म.प्र. औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “एक जिला एक उत्पाद (ODOP)” एवं निर्यात प्रोत्साहन कार्यशाला में स्थानीय उद्यमियों, कृषक प्रतिनिधियों, कारीगरों और वित्तीय व लॉजिस्टिक विशेषज्ञों ने भाग लेकर जिले की निर्यात क्षमताओं को तेज़ करने के ठोस कदम तय किए। बैठक का उद्देश्य सागर के विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ना, वैल्यू-एडिशन बढ़ाना एवं छोटे उद्यमियों को निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी देना था।

वित्तीय वर्ष 2024-25 के आँकड़ों के आधार पर सागर जिले का कुल निर्यात ₹221.76 करोड़ रहा — जिसमें Parboiled Rice (₹11.24 करोड़; 52% हिस्सेदारी) व Soybean Meal (₹1.95 करोड़; 9%) प्रमुख रहे। समग्र निर्यात संरचना में कृषि-आधारित उत्पादों का योगदान करीब 61% था, जबकि औद्योगिक व इंजीनियरिंग गुड्स ने 9%, बिल्डिंग मटेरियल्स 6% और फार्मा-केमिकल्स लगभग 3% का योगदान दिया। इस विविधता ने यह स्पष्ट किया कि सागर केवल कृषि-निर्भर जिला नहीं, बल्कि बहु-उद्योगक संभावनाओं वाला निर्यातिक केंद्र बन सकता है।
कार्यशाला में इंडिया पोस्ट के सहायक अधीक्षक श्री विनय श्रीवास्तव ने सस्ते व भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स विकल्पों का मार्गदर्शन दिया तथा बताया कि कैसे छोटे कारीगर और उद्यमी पोस्ट के माध्यम से सीधे विदेशी खरीदारों तक पहुँच सकते हैं। वॉलमार्ट के श्री समीर मिस्त्री ने ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग, डिजिटल ब्रांडिंग और ग्लोबल मार्केट-एक्सेस पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिनमें स्पष्ट केस-स्टडी और ऑनलाईन प्लेटफ़ॉर्म पर उत्पाद सूचीकरण की विधियाँ शामिल रहीं।

दistrict उद्योग केंद्र (DIC) के श्री कमलेश ने MSME Development Policy 2025 की विवेचना करते हुए सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों के लिए उपलब्ध वर्गीकृत लाभ व सब्सिडी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नीति में पुरुष उद्यमियों के लिये 40% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन व महिलाओं के लिये विशेष रियायतें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे महिला उद्यमिता को बल मिलेगा। SBI के अनुज चौधरी ने Pre-shipment, Post-shipment और Advisory Services सहित LC हेंडलिंग, ब्याज दर व वित्तपोषण विकल्पों पर मार्गदर्शन देते हुए निर्यातकों के लिये बैंकिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया।
कार्यशाला में यह तय किया गया कि सागर को एक वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट हब बनाने हेतु तत्काल रणनीतियाँ अपनायी जाएँगी—कृषि उत्पादों में प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को बढ़ावा, स्टोन क्राफ्ट व बिल्डिंग मटेरियल्स के लिये GI टैगिंग व अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग, फार्मा-केमिकल्स की MSME प्रमाणीकरण सहायता, तथा हस्तशिल्प व ईको-फ्रेंडली उत्पादों के लिये डिजिटल प्रमोशन। सरकार व संस्थागत सहयोग से प्रमाणन, गुणवत्ता नियंत्रण व निर्यात अनुपालन पर तीव्र कार्य किया जाएगा।
प्रयोगात्मक कदमों के रूप में उपलब्ध मशीनरी व संसाधनों के माध्यम से खेत-स्तर प्रदर्शन, निर्यात-तैयारी हेतु प्रशिक्षण शिविर और पैकेजिंग-ब्रांडिंग कार्यशालाएँ आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने हेतु छोटे उद्यमियों को ई-मार्केटप्लेस पर ऑनबोर्ड करने के लिये ट्रेनिंग तथा विक्रेता समूह (Bayer-Seller WhatsApp Groups) बनाने की पहल की गयी, जिससे निरंतर संचार और बाजारों तक पहुँच बनी रहे।
कार्यशाला में उपस्थित विशेषज्ञों व सहभागी उद्यमियों ने कहा कि अगर स्थानीय उत्पादों में वैल्यू-एडिशन, गुणवत्ता मानक और निरंतर मार्केटिंग जोड़ी जाए तो सागर के उत्पाद आसानी से 10 से अधिक देशों में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकते हैं। आयोजन के समापन पर MPIDC और जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया कि तकनीकी सहायता, वित्तपोषण मार्गदर्शन और लॉजिस्टिक समर्थन प्रदान कर सागर के ODOP उत्पादों को “लोकल से ग्लोबल” तक पहुँचाने में निरंतर सहयोग दिया जाएगा।