वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण: सागर कलेक्ट्रेट में गूंजा राष्ट्रगीत, स्वदेशी अपनाने की शपथ के साथ हुआ भव्य आयोजन !

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भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुक्रवार को सागर कलेक्ट्रेट परिसर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रगीत के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति और आत्मनिर्भरता की भावना का अद्भुत समागम देखने को मिला।

कार्यक्रम में विशेष रूप से बीजेपी जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, सागर विधायक प्रदीप लारिया, कलेक्टर संदीप जीआर, पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी सहित प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारियों और आम नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


राष्ट्रीय गीत की गूंज से गूंज उठा कलेक्ट्रेट परिसर

सुबह 10 बजे जैसे ही कलेक्ट्रेट परिसर में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजी, पूरा वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और अतिथियों ने एक स्वर में राष्ट्रगीत गाकर मातृभूमि के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने तिरंगे झंडे लहराते हुए ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। इस दौरान शहर के कई समाजसेवी संगठन, एनएसएस स्वयंसेवक और महिला समूहों ने भी सहभागिता की।


150 वर्षों की गौरवगाथा — ‘वंदे मातरम्’ बना राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ‘वंदे मातरम्’ गीत के इतिहास और उसके 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर भी प्रकाश डाला। बताया गया कि 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आनंदमठ उपन्यास में ‘वंदे मातरम्’ की रचना की थी, जो आगे चलकर आज़ादी के आंदोलन की प्रेरणा बन गई।
ब्रिटिश शासन के खिलाफ जब देशवासी आवाज़ उठा रहे थे, तब यह गीत हर भारतवासी के हृदय में जोश और एकता का प्रतीक बन गया।

वक्ताओं ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी ‘वंदे मातरम्’ की भावना देशवासियों को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।


स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग की ली शपथ

कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रही — ‘स्वदेशी अपनाओ’ शपथ ग्रहण समारोह
कलेक्टर संदीप जीआर के नेतृत्व में उपस्थित सभी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों का अधिकतम उपयोग करेंगे।
उन्होंने कहा — “हमारा हर छोटा निर्णय देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत बना सकता है। स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देकर हम न केवल अपने देश के उद्योगों का समर्थन करते हैं बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हैं।”

इस अवसर पर बीजेपी जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि यह केवल एक गीत का उत्सव नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उत्सव है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को बढ़ावा दें और विदेशी चीजों के अंधानुकरण से बचें।

विधायक प्रदीप लारिया ने भी संबोधित करते हुए कहा कि “150 वर्ष पूर्व रचा गया यह गीत आज भी हमारे भीतर वही जोश भरता है। आज जब देश आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है, तो वंदे मातरम् की भावना हमें नई ऊर्जा देती है।”


कलेक्टर और एसपी ने दी राष्ट्रसेवा की प्रेरणा

कलेक्टर संदीप जीआर ने अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा का असली उद्देश्य जनता की सेवा और राष्ट्रहित में कार्य करना है।
उन्होंने कहा कि “हम सभी को अपने कार्यक्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करते हुए जनता का विश्वास जीतना चाहिए। यही राष्ट्रसेवा का वास्तविक अर्थ है।”
इस दौरान पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने भी युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि समाज में शांति और अनुशासन बनाए रखने से भी सुनिश्चित होती है।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समा

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की वर्षगांठ पर स्थानीय स्कूलों के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीतों और नृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। भारत माता की जय और जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।


वंदे मातरम् – राष्ट्र के स्वाभिमान की पहचान

कार्यक्रम का समापन जिला प्रशासन द्वारा इस संदेश के साथ किया गया —

“वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा, अस्मिता और स्वाभिमान की पहचान है। जब-जब हम इसे गाते हैं, हमें अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपने कर्तव्यों का स्मरण होता है।”

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