ग्वालियर। जिला उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा वाहन चोरी के दावे को खारिज करना ‘सेवा में कमी’ माना है और कंपनी को परिवादी को भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला तब सामने आया जब बीमा कंपनी ने बाइक का लॉक न लगाने और चोरी की सूचना देने में 36 दिन की देरी को आधार बनाकर दावा खारिज कर दिया था।
आयोग ने एचडीएफसी ईआरजीओ जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी अरुण चतुर्वेदी को 16,716 रुपए का भुगतान करे। यह राशि बीमित राशि 22,388 रुपए में से एक्सेस क्लॉज के 100 रुपए घटाकर और शेष राशि पर 25% की कटौती करने के बाद तय की गई। इसके अतिरिक्त, कंपनी को मानसिक प्रताड़ना के लिए 1,500 रुपए और मुकदमा व्यय के रूप में 1,000 रुपए अदा करने होंगे।

अरुण चतुर्वेदी ने अपनी दोपहिया बाइक का बीमा 15 जनवरी 2023 से 14 जनवरी 2024 तक कराया था। बीमा अवधि के दौरान, उनकी बाइक 19 फरवरी 2023 की रात चोरी हो गई। उन्होंने उसी रात बिलौआ थाने में शिकायत दर्ज करवाई और एफआईआर कराई। इसके बाद उन्होंने बीमा कंपनी को घटना की सूचना दी और जांचकर्ता द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए।
हालांकि, 23 जून 2023 को कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि चोरी की सूचना घटना के 36 दिन बाद दी गई थी, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। आयोग ने इसे अनुचित माना और बीमा कंपनी को भुगतान करने का आदेश दिया।