
भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) देश को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह विचार मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक श्री भूपेंद्र सिंह ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत को 2028 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बल मिलेगा। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत संकल्प का ठोस और निर्णायक हिस्सा है।
पूर्व मंत्री श्री सिंह ने कहा कि यह समझौता स्पष्ट करता है कि विश्व आज भारत की आर्थिक यात्रा का हिस्सा बनना चाहता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक प्रगति ने भारत को वैश्विक निवेश और व्यापार के लिए एक आकर्षक हब के रूप में स्थापित किया है।
पूर्व गृहमंत्री श्री सिंह ने कहा कि इस समझौते के बाद भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में अभूतपूर्व एक्सपोजर मिलेगा। यूरोपीय नागरिकों व अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं तक भारतीय वस्तुएं पहुंचेंगी जिससे उनकी वैश्विक स्वीकार्यता और मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ब्रिटेन भारतीय उत्पादों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय शोरूम की तरह होगा, जो भारत को पश्चिमी बाजारों में मजबूती देगा।
उन्होंने बताया कि पहले जहां पाकिस्तान, बांग्लादेश और कंबोडिया के वस्त्र ब्रिटेन में टैक्स फ्री थे, वहीं भारतीय वस्त्रों पर 12% टैक्स लगने से भारत को नुकसान उठाना पड़ता था। अब टैक्स हटने से भारतीय टेक्सटाइल में 20% की वृद्धि का अनुमान है, जिससे कारीगरों को रोज़गार और देश को निर्यात लाभ मिलेगा। इसी तरह ज्वेलरी, फार्मा, ऑटोपार्ट्स, जैविक उत्पाद, फुटवेयर और लेदर जैसे क्षेत्रों में भी निर्यात के नए अवसर बनेंगे।
उन्होंने कहा कि समझौते के तहत महिला उद्यमियों को डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय पहुंच और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलेगी। बायोटेक, वस्त्र उद्योग और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़ी महिलाएं वैश्विक लीडरशिप की ओर कदम बढ़ाएंगी।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़ेगा भारत का वर्चस्व
पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि यह समझौता यूपीए सरकार की आर्थिक कमजोरी के विपरीत, भाजपा सरकार की विकासशील नीति और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूती से बढ़ता कदम है। अब भारत ब्रिटेन के प्रमुख व्यापारिक देशों – जर्मनी, चीन, अमेरिका और फ्रांस के साथ प्रतिस्पर्धा करने को तैयार है।
2030 तक 120 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार हर साल 3 लाख करोड़ रुपये (34 अरब डॉलर) तक बढ़ सकता है। भारत-यूके एफटीए का लक्ष्य 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक व्यापार को पहुंचाना है। अब दोनों देशों के बीच व्यापार का लगभग 100% हिस्सा कर-मुक्त हो जाएगा।
निष्कर्षतः, श्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने, रोज़गार सृजन, महिला सशक्तिकरण और निर्यात वृद्धि के लिए एक मजबूत नींव बनेगा। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत मिशन को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।