“विज्ञान मंथन यात्रा 2025-26” से जागेगी वैज्ञानिक सोच, 375 विद्यार्थियों को मिलेगा इसरो भ्रमण का अवसर !

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मध्यप्रदेश में विज्ञान शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में “विज्ञान मंथन यात्रा 2025-26” का शुभारंभ किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर इस योजना के पोस्टर का विमोचन करते हुए इसे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक अभिनव और प्रेरणादायक कदम बताया। उन्होंने इस पहल के लिए मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य के वैज्ञानिकों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, विज्ञान मंथन यात्रा के प्रमुख डॉ. विवेक कटारे तथा वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. सुनील गर्ग भी उपस्थित रहे। सभी ने इस योजना को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

“विज्ञान मंथन यात्रा 2025-26” का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा ‘मिशन एक्सीलेंस’ अभियान के अंतर्गत किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि, जिज्ञासा और शोध की भावना को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे केवल किताबों तक सीमित न रहकर वास्तविक वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को भी समझ सकें।

इस वर्ष इस यात्रा के लिए प्रदेशभर से कुल 375 मेधावी विद्यार्थियों और 27 शिक्षकों का चयन किया गया है। इसमें कक्षा 10वीं के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के साथ-साथ कक्षा 11वीं और 12वीं के विज्ञान संकाय के विद्यार्थी शामिल हैं। चयनित विद्यार्थियों का चयन उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और विज्ञान के प्रति उनकी रुचि के आधार पर किया गया है।

अप्रैल माह में आयोजित होने वाली इस यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को देश की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्था Indian Space Research Organisation (इसरो) का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा। इसके साथ ही वे श्रीहरिकोटा स्थित प्रमुख अनुसंधान संस्थानों और प्रयोगशालाओं का भी दौरा करेंगे। यह अनुभव विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक साबित होगा।

यात्रा के दौरान छात्र-छात्राओं को इसरो के वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे। वे चंद्रयान मिशन सहित विभिन्न उपग्रहों के मॉडल, उनकी कार्यप्रणाली और अंतरिक्ष अनुसंधान की जटिल प्रक्रियाओं को करीब से समझ पाएंगे। इसके अलावा, उन्हें उन वैज्ञानिकों से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिन्होंने इन मिशनों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में विज्ञान और तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आवश्यक है कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित की जाए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने कहा कि यह यात्रा विद्यार्थियों को न केवल नई जानकारी देगी, बल्कि उन्हें नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करेगी।

इस योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे उनकी तार्किक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मकता में भी वृद्धि होगी। यह पहल विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी और उन्हें देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।

मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद का यह प्रयास राज्य में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की शैक्षणिक यात्राएं विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रभावी होती हैं, क्योंकि वे उन्हें वास्तविक दुनिया से जोड़ती हैं और उनके ज्ञान को व्यावहारिक रूप देती हैं।

कुल मिलाकर “विज्ञान मंथन यात्रा 2025-26” एक ऐसी पहल है, जो न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान को समृद्ध करेगी, बल्कि उन्हें भविष्य के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नवाचारकर्ता बनने के लिए प्रेरित भी करेगी। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से मध्यप्रदेश में विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा।

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