विदिशा जिले के बरखेड़ा गांव में लगातार लापता हो रही लड़कियां: स्थानीय चिंताएं, पुलिस कार्रवाई, और मौजूदा हालात !

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सारांश
विदिशा जिले के बरखेड़ा गांव में पिछले दो महीनों में चार लड़कियां लापता हो चुकी हैं, जिनमें से एक दलित और तीन आदिवासी हैं, जिनमें दो नाबालिग हैं। लापता लड़कियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है और पुलिस की ओर से भी गांववालों को खास मदद नहीं मिली है। इस घटना के बाद से गांव में भय का माहौल है, और लोग अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने से डरने लगे हैं। स्कूल के शिक्षक और गांव के लोग इस भय के कारण लड़कियों की पढ़ाई को भी रोकने लगे हैं।

गांव का माहौल और लोगों की प्रतिक्रिया
बरखेड़ा गांव में करीब 2500 की आबादी है, जिसमें अधिकांश लोग दलित, आदिवासी और पिछड़ी जाति के हैं। गांव के लोग या तो बाहर काम करने जाते हैं या दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं। गांव के लोग इस घटना के बाद से सतर्क हो गए हैं और अपने बच्चों को अकेले कहीं भेजने में डरने लगे हैं। खासतौर पर लड़कियों को लेकर चिंता ज्यादा बढ़ गई है।

लड़कियों के लापता होने की घटनाएं
बरखेड़ा में लापता होने वाली पहली लड़की का मामला 11 दिसंबर का है, जब राम सिंह सहारिया की पत्नी राधा बाई अपने बेटे को डॉक्टर को दिखाने भेजने के बाद घर लौटीं तो उनकी बहू कीर्ति, बेटी राधिका और भांजी आरुषि घर में नहीं थीं। तीनों का कोई पता नहीं चला और उनकी खोजबीन के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला।

आरुषि के पड़ोस में रहने वाली उसकी दोस्त खुशबू ने बताया कि उस दिन वह आरुषि के साथ खेल रही थी, लेकिन अचानक वह गायब हो गई। आरुषि के पिता धन सिंह भी अपनी बेटी की तलाश में परेशान हैं और काम छोड़कर हर जगह अपनी बेटी को ढूंढ रहे हैं।

दूसरी घटना और लापता दूसरी लड़की
आरुषि के लापता होने के बाद, 4 जनवरी को कुसुम वंशकार की 18 साल की बेटी नेहा वंशकार भी गायब हो गई। नेहा के माता-पिता ने बताया कि नेहा घर में थी और अचानक गायब हो गई। उन्होंने पुलिस और गांववालों से मदद मांगी, लेकिन फिर भी कोई जानकारी नहीं मिली।

गांव में डर और बच्चों की पढ़ाई पर असर
स्कूल के प्रधानाचार्य निरंजन सिंह बागड़ी ने बताया कि पुलिस ने गायब हुई लड़कियों के जन्म प्रमाणपत्र की जानकारी मांगी थी और वह जानकारी स्कूल ने पुलिस को भेजी थी। हालांकि, इस घटना के बाद गांववालों ने अपनी बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है, क्योंकि वे डरते हैं कि ऐसी घटनाएं फिर से हो सकती हैं। स्कूल की शिक्षक संगूजी राय ने भी कहा कि अभिभावक अपनी बेटियों को स्कूल भेजने से डरते हैं।

पुलिस की कार्रवाई और आश्वासन
एसडीओपी मनीष राज ने बताया कि पुलिस ने लापता लड़कियों के परिजनों और गांववालों से बात की है और स्कूल से उनका रिकॉर्ड लिया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और लापता लड़कियों के बारे में कुछ लीड्स मिली हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि तीन-चार दिनों के अंदर पुलिस उन लड़कियों को ढूंढकर उनके घर वापस लाएगी।

प्रदेश में गुम होने वाली लड़कियों का आंकड़ा
प्रदेश में पिछले तीन सालों में गुम होने वाली लड़कियों और महिलाओं की संख्या भी चिंताजनक है। पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था और मुख्यमंत्री ने बताया था कि 1 जुलाई 2021 से 31 मई 2024 तक विदिशा जिले में कुल 225 महिलाएं और बच्चियां गुम हो चुकी हैं, जबकि पूरे प्रदेश में यह आंकड़ा 23451 महिलाओं और 1919 बच्चियों का है।


बरखेड़ा गांव में लड़कियों के लगातार लापता होने से गांववालों के बीच डर का माहौल है, और इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है, और कुछ लीड्स भी मिली हैं, लेकिन फिर भी यह मुद्दा गंभीर बना हुआ है। प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के गुम होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जो समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। यह घटना इस बात का संकेत है कि समाज में सुरक्षा के उपायों को और सख्त करने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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