सागर/25 नवम्बर 2025
सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक, शिक्षाशास्त्री, न्यायविद, समाज सुधारक, साहित्यकार, महादानी और राष्ट्रभक्त डॉ. सर हरीसिंह गौर की 156वीं जयंती पर आज न केवल बुंदेलखंड, बल्कि पूरा देश इस महान व्यक्तित्व को पुण्य स्मरण कर रहा है। इसी श्रद्धा और कृतज्ञता के भाव के साथ सागर में गौर जयंती सप्ताह एवं गौर उत्सव के अंतर्गत विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय की काव्यांजलि में शामिल हुए विधायक लारिया
सागर विश्वविद्यालय द्वारा गौर सप्ताह के तहत आयोजित “विश्वविद्यालय परिवार की काव्यांजलि” कार्यक्रम में नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने डॉ. गौर के व्यक्तित्व पर काव्य व विचार प्रस्तुत किए।
विधायक लारिया ने इस अवसर को डॉ. गौर के अमूल्य योगदान को समझने, उन्हें नमन करने और आने वाली पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी विचारों से जोड़ने का माध्यम बताया।

प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं समाधि स्थल पर पुष्पांजलि
कार्यक्रम के पश्चात विधायक प्रदीप लारिया ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित डॉ. हरीसिंह गौर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वह समाधि स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्रनिर्माता इस महापुरुष के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
इस दौरान विधायक ने कहा कि डॉ. गौर जैसी विभूतियाँ युगों के लिए प्रेरणा बनती हैं। उन्होंने समाज, शिक्षा और राष्ट्र के उत्थान के लिए जो कार्य किए, वे भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्याय हैं।

डॉ. गौर के चिंतन का स्मरण
विधायक लारिया ने इस अवसर पर डॉ. हरीसिंह गौर के एक अत्यंत गहन और प्रेरक वाक्यांश को श्रद्धापूर्वक दोहराया—
“राष्ट्र का धन न सोने-चांदी के खजाने में या न कारखानों में सुरक्षित रहता है, यह केवल नागरिकों के मन और ज्ञान में समाया रहता है।”
उन्होंने कहा कि इस विचार में राष्ट्र निर्माण की वास्तविक दिशा निहित है। देश की प्रगति तभी संभव है जब उसके नागरिक शिक्षित, जागरूक और मूल्यनिष्ठ हों। डॉ. गौर ने इसी विचार को जीवन में उतारकर एक ऐसे विश्वविद्यालय की स्थापना की, जिसने लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा।
डॉ. गौर का अविस्मरणीय योगदान
रिपोर्ट में यह उल्लेख करना समीचीन है कि डॉ. हरीसिंह गौर ने अपनी संपूर्ण निजी आय समाजसेवा और शिक्षा के लिए समर्पित कर दी। उन्होंने सागर में विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए अपनी सारी संपत्ति दान में दे दी, जो आज देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शुमार है।

उनकी दूरदर्शिता, त्याग, सामाजिक चेतना और ज्ञान के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें ‘एशिया के सबसे बड़े दानवीर’ तथा ‘आधुनिक सागर के निर्माता’ के रूप में भी जाना जाता है।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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